विस्तृत उत्तर
नैवेद्य का अर्थ है भगवान को भोजन अर्पित करना। शास्त्रों में सबसे उत्तम नैवेद्य भाव से अर्पित कोई भी सात्विक वस्तु है।
गीता 9.26 में कृष्ण ने स्वयं कहा — 'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति' अर्थात जो भक्ति से एक पत्ता, फूल, फल या जल भी अर्पित करे, मैं स्वीकार करता हूं। इसलिए भाव सबसे ऊपर है, वस्तु गौण।
फिर भी देवता अनुसार विशेष नैवेद्य हैं — गणेश को मोदक/लड्डू, शिव को बेलपत्र और दूध, विष्णु को तुलसी और पंचामृत, हनुमान को बेसन लड्डू, लक्ष्मी को खीर और मिश्री।
सामान्य सर्वोत्तम नैवेद्य: पंचामृत (दूध+दही+घी+शहद+शक्कर), फल, तुलसी जल, घर का बना ताजा भोजन। बासी, चखा हुआ, या अशुद्ध भोजन कभी न अर्पित करें।





