विस्तृत उत्तर
ब्रह्म विवाह = पिता स्वेच्छा से योग्य (वेदज्ञ/सदाचारी) वर को कन्या अलंकृत कर दान।
उत्तम क्यों: कोई लेन-देन नहीं (आर्ष=गाय; आसुर=धन)। कन्या इच्छा/सम्मान = केंद्र। वर = योग्यता (धन/सत्ता नहीं) आधारित। दोनों परिवार सहमत = सामाजिक स्थिरता। कन्यादान = सर्वोच्च दान (पुण्य)।
आज: arranged marriage (परिवार खोजे + वर-कन्या सहमत) = ब्रह्म विवाह निकटतम। दहेज = ब्रह्म विवाह नहीं; दहेज = आसुर (धन लेन-देन = निंदित)।
सार: योग्यता+सम्मान+सहमति+निःस्वार्थ = ब्रह्म। धन/दबाव/दहेज = अधर्म।





