विस्तृत उत्तर
मनुस्मृति (3.20-34) — 8 विवाह प्रकार:
शुभ (प्रशस्त)
- 1ब्रह्म — पिता कन्या को वेदज्ञ वर को दान (सर्वोत्तम)
- 2दैव — यज्ञ में ऋत्विज (पुरोहित) को कन्यादान
- 3आर्ष — वर से गो-मिथुन (गाय+बैल) लेकर कन्या देना
- 4प्राजापत्य — 'धर्म पालन करो' कहकर कन्या देना
मध्यम
- 1गांधर्व — वर-कन्या परस्पर प्रेम+सहमति (love marriage)
- 2आसुर — वर धन देकर कन्या खरीदे (निंदनीय)
निंदित
- 1राक्षस — बलपूर्वक कन्या हरण (युद्ध बाद)
- 2पैशाच — सोती/बेहोश कन्या (सर्वाधिक निंदित)
आज: ब्रह्म+गांधर्व = सबसे प्रचलित। 6-7-8 = अपराध।





