ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

मनुस्मृति से जुड़े सभी प्रश्न(26)

मनुस्मृति पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 26 प्रश्न उपलब्ध हैं।

आत्मा सिद्धांत

पेड़-पौधों में आत्मा होती है क्या — शास्त्रीय प्रमाण?

हाँ। मनुस्मृति (1.49): वनस्पति = उद्भिज्ज जीव। महाभारत (शांति पर्व 184): वृक्षों में जीवात्मा, सुख-दुख अनुभव। पद्म पुराण: 20 लाख योनियाँ पेड़-पौधों। जगदीश चंद्र बोस ने वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया। पीपल/तुलसी पूजा इसीलिए।

#पेड़ पौधे#आत्मा#जीव
कर्म सिद्धांत

अनजाने में किया गया पाप भी लगता है क्या?

हाँ, अनजाने पाप का फल भी मिलता है (मनुस्मृति) — जैसे अग्नि अनजाने छूने पर भी जलाती है। पर जानबूझकर किए पाप से हल्का। प्रायश्चित (तप, जप, दान) से क्षमा संभव। गीता (4.37): ज्ञान की अग्नि सभी कर्मों को भस्म करती है।

#अनजाने पाप#कर्मफल#प्रायश्चित
धर्म ज्ञान

जाति व्यवस्था और वर्ण व्यवस्था में क्या अंतर?

वर्ण = गुण-कर्म आधारित (गीता 4.13), 4 वर्ण, परिवर्तनीय। जाति = जन्म आधारित, हजारों उप-जातियाँ, अपरिवर्तनीय। जाति व्यवस्था वर्ण की विकृति है। गीता: 'चातुर्वर्ण्यं गुणकर्मविभागशः' — जन्म से नहीं, गुण-कर्म से।

#जाति#वर्ण#अंतर
लोक

विद्वान ब्राह्मण को भोजन कराने से 7 पीढ़ियों को तृप्ति कैसे मिलती है?

सुपात्र ब्राह्मण को श्राद्ध भोजन कराने से मंत्र और श्रद्धा के प्रभाव से सात पीढ़ियों तक पितृ तृप्ति मानी गई है।

#ब्राह्मण भोजन#7 पीढ़ी तृप्ति#श्राद्ध
लोक

मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति में 7 पीढ़ी का क्या प्रमाण है?

मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति पितृकुल में सात और मातृकुल में पाँच पीढ़ी तक सपिण्डता बताती हैं।

#मनुस्मृति#याज्ञवल्क्य स्मृति#7 पीढ़ी
लोक

सुकालिन पितर किस वर्ग से जुड़े हैं?

सुकालिन पितर शूद्र वर्ण के धर्मपूर्वक जीवन जीने वाले पूर्वजों से संबंधित हैं।

#सुकालिन पितर#शूद्र पितर#मनुस्मृति
लोक

आज्यपा या काव्य पितर कौन हैं?

आज्यपा या काव्य वैश्यों के पितर हैं, जिन्हें घृत भक्षण करने वाला पितृ वर्ग माना गया है।

#आज्यपा पितर#काव्य पितर#वैश्य पितर
लोक

मेधातिथि ने वसु-रुद्र-आदित्य सिद्धांत की क्या व्याख्या की?

मेधातिथि ने कहा कि पूर्वजों को वसु, रुद्र और आदित्य रूप जानकर व्यक्ति श्रद्धा से श्राद्ध करे, क्योंकि यह वेद-विहित शाश्वत व्यवस्था है।

#मेधातिथि#मनुस्मृति#वसु रुद्र आदित्य
लोक

मनुस्मृति में वसु-रुद्र-आदित्य पितृ वर्गीकरण का क्या प्रमाण है?

मनुस्मृति 3.284 पिता को वसु, पितामह को रुद्र और प्रपितामह को आदित्य बताती है और इसे सनातन श्रुति कहती है।

#मनुस्मृति#वसु रुद्र आदित्य#पितृ वर्गीकरण
लोक

पिता को वसु, दादा को रुद्र और परदादा को आदित्य क्यों कहा गया है?

पिता स्थूल भौतिक संबंध से वसु, दादा सूक्ष्म प्राणिक अवस्था से रुद्र और परदादा प्रकाशमय मोक्षोन्मुख स्तर से आदित्य कहलाते हैं।

#पिता वसु#दादा रुद्र#परदादा आदित्य
लोक

पितामह को रुद्र स्वरूप क्यों माना जाता है?

पितामह दूसरी पीढ़ी है और पितृ यात्रा के सूक्ष्म प्राणिक स्तर का प्रतिनिधि है, इसलिए उसे रुद्र स्वरूप कहा गया है।

#पितामह#रुद्र स्वरूप#दादा
लोक

पितरों को वसु, रुद्र और आदित्य रूप क्यों माना गया है?

शास्त्रों में पिता को वसु, दादा को रुद्र और परदादा को आदित्य कहा गया है, इसलिए पितर देवस्वरूप माने जाते हैं।

#वसु रुद्र आदित्य#पितृ#श्राद्ध
लोक

शूद्र धर्म से च्युत होने पर चैलाशक प्रेत क्यों बनता है?

सेवा धर्म छोड़ने, अशिष्ट आचरण और धर्मच्युति के कारण शूद्र चैलाशक प्रेत बनता है।

#शूद्र धर्म#चैलाशक#सेवा धर्म
लोक

चैलाशक प्रेत कौन होता है?

चैलाशक धर्म से च्युत शूद्र की प्रेत योनि है, जिसमें वह मलिन चिथड़ों को खाने के लिए विवश होता है।

#चैलाशक प्रेत#शूद्र#मनुस्मृति
लोक

मैत्राक्षज्योतिक प्रेत कौन होता है?

मैत्राक्षज्योतिक धर्म से च्युत वैश्य की प्रेत योनि है, जो छल-कपट और अनुचित धन संचय का फल है।

#मैत्राक्षज्योतिक#वैश्य#प्रेत योनि
लोक

क्षत्रिय धर्म छोड़ने पर कटपूतन प्रेत क्यों बनता है?

प्रजा-रक्षा छोड़कर कायरता, निर्दयता और अधर्म अपनाने वाला क्षत्रिय कटपूतन प्रेत बनता है।

#क्षत्रिय धर्म#कटपूतन#प्रजा रक्षा
लोक

कटपूतन प्रेत कौन होता है?

कटपूतन धर्म से च्युत क्षत्रिय की प्रेत योनि है, जिसमें वह दुर्गंधयुक्त होकर मृत शरीरों और अशुद्ध पदार्थों का भक्षण करता है।

#कटपूतन प्रेत#क्षत्रिय#मनुस्मृति
लोक

ब्राह्मण धर्म से च्युत होने पर उल्कामुख प्रेत क्यों बनता है?

ब्राह्मण का मुख वेद-मंत्रों के लिए है; उसके धर्म-विरोधी दुरुपयोग से वह उल्कामुख प्रेत योनि पाता है।

#ब्राह्मण धर्म#उल्कामुख#प्रेत योनि
लोक

उल्कामुख प्रेत कौन होता है?

उल्कामुख वह प्रेत है जो धर्म से च्युत ब्राह्मण को मिलता है; उसके मुख से अग्नि निकलती है और वह वमनित मल खाने को विवश होता है।

#उल्कामुख प्रेत#मनुस्मृति#ब्राह्मण
लोक

मनुस्मृति में वर्ण-आधारित प्रेत योनियाँ क्या हैं?

मनुस्मृति में ब्राह्मण के लिए उल्कामुख, क्षत्रिय के लिए कटपूतन, वैश्य के लिए मैत्राक्षज्योतिक और शूद्र के लिए चैलाशक प्रेत बताए गए हैं।

#मनुस्मृति#वर्ण आधारित प्रेत#उल्कामुख
हिंदू दर्शन

गृहस्थ और संन्यास में श्रेष्ठ क्या है?

मनुस्मृति और गीता दोनों के अनुसार गृहस्थाश्रम श्रेष्ठ है — सभी तीन अन्य आश्रम गृहस्थ पर ही निर्भर हैं। गीता में निष्काम कर्मी गृहस्थ को अकर्मण्य संन्यासी से श्रेष्ठ बताया गया है। राजा जनक गृहस्थ रहते हुए जीवनमुक्त हुए — यही शास्त्रों का आदर्श है।

#गृहस्थ#संन्यास#आश्रम
धर्मशास्त्र एवं संस्कार

सगोत्र विवाह वर्जित क्यों शास्त्रीय कारण

सगोत्र विवाह इसलिए वर्जित है क्योंकि एक ही गोत्र के लोग एक ही ऋषि के वंशज हैं — अतः भाई-बहन समान हैं। साथ ही एक ही रक्त-वंश में विवाह से अनुवांशिक दोष उत्पन्न होते हैं।

#सगोत्र विवाह#गोत्र#धर्मशास्त्र
गृहस्थ धर्म

विवाह आठ प्रकार कौन से

8 प्रकार (मनुस्मृति): ब्रह्म (सर्वोत्तम), दैव, आर्ष, प्राजापत्य (शुभ); गांधर्व (प्रेम), आसुर (धन — निंदित); राक्षस, पैशाच (सर्वाधिक निंदित)। आज: ब्रह्म+गांधर्व प्रचलित।

#विवाह#8 प्रकार#मनुस्मृति
हिंदू दर्शन

हिंदू धर्म में नैतिकता के दस नियम कौन से

मनुस्मृति 6.92 — धर्म के 10 लक्षण: धृति (धैर्य), क्षमा, दम (संयम), अस्तेय (अचौर्य), शौच (शुद्धता), इंद्रिय निग्रह, धी (बुद्धि/विवेक), विद्या (ज्ञान), सत्य, अक्रोध। ये सार्वभौमिक — जाति/वर्ण/लिंग से परे, सभी मनुष्यों का धर्म।

#नैतिकता#दस लक्षण#धर्म
हिंदू दर्शन

मनुस्मृति में क्या लिखा है और आज प्रासंगिकता

मनुस्मृति: सृष्टि, संस्कार, गृहस्थ-राज-वर्ण धर्म, मोक्ष — 12 अध्याय, ~2,685 श्लोक। सकारात्मक: नारी सम्मान (3.56), धर्म के 10 लक्षण, राजधर्म। विवादित: वर्ण भेद, स्त्री प्रतिबंध — संभवतः प्रक्षेप। प्रासंगिक: नैतिक सिद्धांत; अप्रासंगिक: जन्म आधारित भेद।

#मनुस्मृति#धर्मशास्त्र#कानून
हिंदू दर्शन

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते श्लोक का अर्थ

मनुस्मृति 3.56 — जहां नारियां सम्मानित होती हैं, वहां देवता निवास करते हैं। जहां सम्मान नहीं, सब कर्म निष्फल। 3.57 — जहां स्त्रियां दुःखी, वह कुल नष्ट; जहां प्रसन्न, वह कुल सदा बढ़ता है। 'पूजन' = सम्मान, अधिकार, गरिमा, प्रेम।

#नारी सम्मान#मनुस्मृति#श्लोक
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।