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विस्तृत उत्तर
चैलाशक वह प्रेत है जो शूद्र के धर्म से च्युत होने पर प्राप्त होता है। मनुस्मृति के अनुसार, सेवा धर्म का परित्याग, अशिष्ट आचरण और धर्म से च्युत होना शूद्र को चैलाशक प्रेत बनाता है। 'चैल' का अर्थ वस्त्र है। यह प्रेत फेंके हुए, मलिन और अशुद्ध वस्त्रों या चिथड़ों को खाने के लिए विवश होता है। यह अवस्था सेवा धर्म से पतन और अशिष्ट आचरण का कर्म-विपाक है।
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