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विस्तृत उत्तर
मनुस्मृति के अनुसार, ब्राह्मण यदि वेद-त्याग करता है, तपहीन हो जाता है, अखाद्य भक्षण करता है और धर्म से च्युत होता है, तो वह उल्कामुख प्रेत बनता है। उल्कामुख का अर्थ है जिसके मुख से अग्नि की लपटें निकलती हों। यह प्रेत वमन किया हुआ मल खाने को विवश होता है। इसका कारण यह बताया गया है कि ब्राह्मण का मुख अग्नि और वेद-मंत्रों के लिए था; जब वह मुख धर्म-विरुद्ध आचरण में लग जाता है, तो उसके दुरुपयोग से वह अग्नि-तुल्य दग्ध हो जाता है।
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