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विस्तृत उत्तर
मनुस्मृति और अन्य स्मृतियों के अनुसार श्राद्ध के समय सुपात्र और विद्वान ब्राह्मण को भोजन कराने से सात पीढ़ियों तक निरंतर तृप्ति रहती है। श्राद्ध में दिया गया अन्न केवल लौकिक भोजन नहीं माना गया, बल्कि मंत्र, श्रद्धा और पितृ-संकल्प से युक्त पारलौकिक अर्पण है। यह अर्पण पितरों तक उनकी अवस्था और योनि के अनुरूप पहुँचता है।
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