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विस्तृत उत्तर
सुकालिन पितर शूद्र वर्ण के पितर माने गए हैं। नान्दीपुराण और मनुस्मृति के अनुसार वे शूद्र पूर्वज जिन्होंने धर्मपूर्वक जीवन व्यतीत किया, सुकालिन पितृ श्रेणी से संबंधित हैं। यह वर्गीकरण दर्शाता है कि पितृलोक में आत्मा की स्थिति उसके सांसारिक कर्म और धर्माचरण के अनुसार निर्धारित होती है।
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