विस्तृत उत्तर
पिता को वसु, दादा को रुद्र और परदादा को आदित्य इसलिए कहा गया है क्योंकि शास्त्र तीन पीढ़ियों को क्रमशः स्थूल, सूक्ष्म और प्रकाशमय पितृ अवस्थाओं से जोड़ते हैं। पिता यजमान के भौतिक शरीर का निकटतम कारण है, इसलिए वह वसु स्वरूप है, जो भौतिक तत्त्वों का धारक है। पितामह दूसरी पीढ़ी है और वह सूक्ष्म प्राणिक अवस्था का प्रतीक है, इसलिए रुद्र स्वरूप है। प्रपितामह तीसरी पीढ़ी है और वह उच्चतम प्रकाशमय, मोक्षोन्मुख अवस्था का प्रतिनिधि है, इसलिए आदित्य स्वरूप है। मनुस्मृति में इसे सनातन श्रुति कहा गया है।
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