विस्तृत उत्तर
महादान = सबसे पुण्यदायक दान; गरुड़ पुराण/धर्मसिंधु:
10 महादान: गोदान (गाय), भूमिदान (जमीन), तिलदान, स्वर्णदान, घृतदान (घी), वस्त्रदान, धान्यदान (अनाज), गुड़दान, रजतदान (चांदी), लवणदान (नमक)।
फल: गोदान = वैतरणी नदी पार (मृत्यु बाद); भूमिदान = अक्षय पुण्य; अन्नदान = सबसे बड़ा (सर्वप्राणी तृप्ति); विद्यादान = सर्वोच्च (गीता/शास्त्र)। दान = 'इह+पर' दोनों लोक सुख।
सबसे बड़ा दान: अभय दान (किसी का भय दूर) + विद्यादान = सर्वोपरि (भौतिक से ऊपर)।
नियम: श्रद्धा+सम्मान से; पात्र (योग्य) को; यथाशक्ति। भाव > मात्रा। 'दातव्यम्' (देना चाहिए) = गीता 17.20।





