विस्तृत उत्तर
विवादित — ईमानदारी से दोनों पक्ष:
वैदिक काल: ऋग्वेद/अथर्ववेद = पुनर्विवाह उल्लेख। 'नियोग' प्रथा = पति मृत्यु/असमर्थ → अन्य पुरुष से संतान (मान्य)। महाभारत: माद्री/कुंती = नियोग। पुनर्विवाह = वर्जित नहीं।
मध्यकालीन: मनुस्मृति/स्मृतियां = विधवा पुनर्विवाह प्रतिबंध बढ़ा। सती प्रथा = मध्यकालीन (वैदिक नहीं)। 'एक पत्नी व्रत' = आदर्श पर अनिवार्य नहीं।
आधुनिक: हिंदू विवाह अधिनियम 1955 = पुनर्विवाह कानूनी अधिकार। ईश्वरचंद्र विद्यासागर = विधवा विवाह आंदोलन। आर्य समाज = पूर्ण समर्थन।
सार: वैदिक=मान्य; मध्यकालीन=प्रतिबंध; आज=कानूनी+नैतिक अधिकार। जीवन=ईश्वर का उपहार; पुनर्विवाह=नया अवसर।

