गृहस्थ धर्मपुनर्विवाह हिंदू शास्त्र क्या कहतेवैदिक=मान्य (नियोग/ऋग्वेद)। मध्यकालीन=प्रतिबंध। आज=कानूनी अधिकार (1955)। विद्यासागर/आर्य समाज=समर्थन। जीवन=ईश्वर उपहार; पुनर्विवाह=नया अवसर।#पुनर्विवाह#शास्त्र#विधवा
गृहस्थ धर्मविधवा पुनर्विवाह शास्त्रों में स्वीकार्य क्याहाँ — वैदिक (अथर्ववेद मंत्र; पाराशर=कलियुग मान्य)। प्रतिबंध=मध्यकालीन/सामाजिक। आज=कानूनी+नैतिक अधिकार। ईश्वर दयालु; खुश रहना=धर्म।#विधवा#पुनर्विवाह#स्वीकार्य
दैनिक आचारविधवा स्त्री को कौन सी पूजा करनी चाहिएसभी पूजा कर सकती हैं — कोई मूलभूत रोक नहीं। शिव (शांति), विष्णु/कृष्ण (मीरा उदाहरण), देवी, गायत्री — सब अनुमत। पुरानी प्रतिबंधात्मक प्रथाएं = सामाजिक कुरीति, शास्त्रीय नहीं। गीता 9.32 — सभी स्त्री = परम गति।#विधवा#पूजा#भक्ति
स्त्री धर्मविधवा स्त्री कौन से व्रत रख सकती है?सभी व्रत रख सकती — एकादशी/प्रदोष/नवरात्रि विशेष शुभ। केवल सुहाग व्रत(करवा चौथ/वट सावित्री)=न रखें। भविष्य पुराण: विधवा=मंत्र+पूजा अधिकार। रूढ़ि≠शास्त्र।#विधवा#व्रत#अधिकार