विस्तृत उत्तर
विधवा स्त्री सभी व्रत रख सकती है — कोई शास्त्रीय निषेध नहीं।
विशेष शुभ: एकादशी (सबसे उत्तम — विष्णु भक्ति, मोक्ष), प्रदोष व्रत (शिव), नवरात्रि (देवी), कार्तिक स्नान, गीता जयंती। ये सभी आध्यात्मिक उन्नति के व्रत — पति से संबंधित नहीं।
केवल 'सुहाग' व्रत = न रखें: करवा चौथ, वट सावित्री, हरतालिका = पति दीर्घायु हेतु — विधवा के लिए अनुचित (भावनात्मक कारण)।
भविष्य पुराण (उत्तरपर्व 4/13): *'विधवा स्त्री वेद-मंत्र ग्रहण करे'* — विधवा को मंत्र+व्रत+पूजा = पूर्ण अधिकार।
सार: विधवा = ईश्वर भक्ति का पूर्ण अधिकार। समाज की रूढ़ि ≠ शास्त्रीय नियम।
