विस्तृत उत्तर
हाँ — मानसिक नाम जप (मन में) = पूर्णतः मान्य।
भगवान का नाम = सबसे पवित्र — कोई शारीरिक अवस्था इसे रोक नहीं सकती। श्वास चल रही = नाम जप चल सकता। 'राम-राम', 'ॐ नमः शिवाय', 'हरे कृष्ण' = मन में जपना = किसी भी अवस्था में।
वाचिक (बोलकर) जप: कुछ परंपरा = वर्जित। कुछ = मान्य। मानसिक जप = सर्वमान्य।
गीता: *'मन्मना भव मद्भक्तो'* (9.34) — मन मुझमें लगाओ = कोई शर्त नहीं। भगवान ने कभी नहीं कहा 'मासिक में मेरा नाम मत लो।'
सार: ईश्वर स्मरण = 24×7×365 — कोई विराम नहीं।





