विस्तृत उत्तर
शास्त्रों का मत है कि कलयुग में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और मोक्ष प्राप्ति का सबसे सुलभ, सहज और प्रभावशाली मार्ग 'भक्ति' और 'नाम संकीर्तन' है।
सत्ययुग में जो फल कठिन तपस्या से, त्रेता में बड़े-बड़े यज्ञों से, और द्वापर में विधि-विधान से पूजा करने से मिलता था, वह कलयुग में केवल भगवान के नाम-जप से सुलभ हो जाता है।
भगवान कृष्ण गीता में स्वयं अपने भक्तों को आश्वासन देते हैं — 'तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्' (जो निरंतर मेरा स्मरण करते हैं, उनका योग-क्षेम मैं स्वयं वहन करता हूँ)।
कलयुग में जीव के उद्धार का सबसे प्रशस्त मार्ग नवधा भक्ति, अष्टाक्षर मंत्र (ॐ नमो नारायणाय) का एकाग्रचित्त जाप और विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ है।





