विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार कलियुग में ईश्वर के नाम का जप ही मोक्ष का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है।
प्रमुख मोक्षदायक नाम
- 1राम नाम — तुलसीदास: *'राम नाम मणि दीप धरु जीह देहरी द्वार'* — जीभ रूपी द्वार पर राम नाम की मणि रख दो। रामचरितमानस में राम नाम को कलियुग का सर्वश्रेष्ठ आधार बताया गया।
- 1हरे कृष्ण महामंत्र — कलिसंतरण उपनिषद में:
*'हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।'*
— इन 16 नामों के कीर्तन से कलियुग के सभी दोष नष्ट होते हैं।
- 1ॐ नमो नारायणाय — अष्टाक्षर मंत्र, वैष्णव परंपरा में मोक्षदायक।
- 1ॐ नमः शिवाय — पंचाक्षर मंत्र, शैव परंपरा में मोक्षदायक।
- 1ॐ — प्रणव मंत्र, सभी मंत्रों का मूल, सर्वोच्च ब्रह्म का प्रतीक (माण्डूक्य उपनिषद)।
- 1विष्णु सहस्रनाम — महाभारत में भीष्म पितामह ने कहा — विष्णु सहस्रनाम का पाठ सभी पापों का नाश करता है।
भागवत पुराण (12.3.51-52): कलियुग में केवल कृष्ण नाम कीर्तन से वही फल मिलता है जो सतयुग में ध्यान, त्रेता में यज्ञ और द्वापर में पूजा से मिलता था।
सार: कोई भी नाम — राम, कृष्ण, शिव, हरि, नारायण — श्रद्धा और निरंतरता से जपने पर मोक्षदायक है। नाम कम, भाव अधिक महत्वपूर्ण।





