का सरल उत्तर
कलयुग में सुलभ मार्ग = भक्ति और नाम संकीर्तन। सत्ययुग = तपस्या; त्रेता = यज्ञ; द्वापर = विधि-पूजा — वही फल कलयुग में केवल नाम-जप से। गीता: 'तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्।' उपाय: नवधा भक्ति, 'ॐ नमो नारायणाय', विष्णु सहस्रनाम।
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