विस्तृत उत्तर
महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित 'विष्णु सहस्रनाम' स्तोत्र का वैष्णव संप्रदाय में सर्वोच्च स्थान है। जब पितामह भीष्म बाणों की शय्या पर थे, तब उन्होंने युधिष्ठिर को भगवान विष्णु के एक हज़ार नामों का उपदेश दिया था। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित यह स्तोत्र स्पष्ट करता है कि संसार का मूल कारण और परम आश्रय नारायण ही हैं।
कलयुग में विष्णु सहस्रनाम का नित्य पाठ या श्रवण करने से वाणी शुद्ध होती है, श्वास और मन स्थिर होते हैं, नकारात्मकता का नाश होता है और सांसारिक कल्याण के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।





