विस्तृत उत्तर
पर्जन्यास्त्र की एक अद्भुत विशेषता इसके प्रयोग में लचीलापन था। इसका प्रयोग आवश्यकतानुसार अत्यंत सूक्ष्म रूप में, जैसे कि कुछ बूंद जल उत्पन्न करने के लिए, अथवा अत्यंत विराट रूप में, जैसे कि एक बड़े क्षेत्र में प्रलयंकारी वर्षा कराने के लिए, किया जा सकता था। इसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण महाभारत में मिलता है जब अर्जुन ने शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह की प्यास बुझाने के लिए पर्जन्यास्त्र के सूक्ष्म रूप का प्रयोग कर पृथ्वी से जल की एक निर्मल धारा उत्पन्न की थी। यह घटना अस्त्र के धारक के असाधारण नियंत्रण और अस्त्र की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है।
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