विस्तृत उत्तर
लक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्र देवी लक्ष्मी के 1000 नामों का संकलन है:
परिचय
- ▸स्रोत: स्कंद पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में यह मिलता है
- ▸नामों की संख्या: 1000 (सहस्र = एक हजार)
- ▸पाठ का फल: सभी मनोकामनाएं पूर्ण, धन-धान्य, सौभाग्य और मोक्ष
लक्ष्मी सहस्रनाम के प्रमुख नाम (100 प्रमुख)
- 1श्री, 2. लक्ष्मी, 3. पद्मा, 4. पद्मालया, 5. पद्ममालिनी, 6. पद्मप्रिया, 7. पद्महस्ता, 8. पद्माक्षी, 9. पद्मसुंदरी, 10. पद्मोद्भवा,
- 2पद्ममुखी, 12. पद्मनाभप्रिया, 13. रमा, 14. पद्ममालाधरा, 15. देवी, 16. पद्मिनी, 17. पद्मगंधिनी, 18. पुण्यगंधा, 19. सुप्रसन्ना, 20. प्रसादाभिमुखी,
- 3प्रभा, 22. चंद्रवदना, 23. चंद्रा, 24. चंद्रसहोदरी, 25. चतुर्भुजा, 26. चंद्ररूपा, 27. इंदिरा, 28. इंदुशीतला, 29. आह्लादजननी, 30. पुष्टि,
- 4शिवा, 32. शिवकरी, 33. सत्या, 34. विमला, 35. विश्वजननी, 36. पुष्टि, 37. दारिद्र्यनाशिनी, 38. प्रीतिपुष्करिणी, 39. शांता, 40. शुक्लमाल्यांबरा,
- 5श्री, 42. भास्करी, 43. बिल्वनिलया, 44. वरारोहा, 45. यशस्विनी, 46. वसुंधरा, 47. उदारांगा, 48. हरिणी, 49. हेममालिनी, 50. धनधान्यकी,
- 6सिद्धि, 52. स्त्रैणसौम्या, 53. शुभप्रदा, 54. नृपवेश्मगतानंदा, 55. वरलक्ष्मी, 56. वसुप्रदा, 57. शुभा, 58. हिरण्यप्राकारा, 59. समुद्रतनया, 60. जया,
- 7मंगला, 62. देवि, 63. विष्णुवक्षःस्थलस्थिता, 64. विष्णुपत्नी, 65. प्रसन्नाक्षी, 66. नारायणसमाश्रिता, 67. दारिद्र्यध्वंसिनी, 68. देवी, 69. सर्वोपद्रवनिवारिणी, 70. नवदुर्गा,
- 8महाकाली, 72. ब्रह्मविष्णुशिवात्मिका, 73. त्रिकालज्ञानसंपन्ना, 74. भुवनेश्वरी, 75. अनंता, 76. अष्टलक्ष्मी, 77. महालक्ष्मी, 78. त्रिभुवनेश्वरी, 79. क्षमा, 80. दया,
- 9करुणा, 82. भक्तवत्सला, 83. कल्याणी, 84. कल्यदायिनी, 85. धात्री, 86. सर्वसंपत्प्रदायिनी, 87. सर्वसौभाग्यदायिनी, 88. ऐश्वर्यदायिनी, 89. मंगलकारिणी, 90. सर्वांगसुंदरी,
- 10सर्वसिद्धिप्रदा, 92. सर्वलोकप्रिया, 93. त्रिलोकमाता, 94. मोक्षदायिनी, 95. वैकुंठनिलया, 96. परमा, 97. श्रेष्ठा, 98. विश्वमाता, 99. सर्वेश्वरी, 100. जगन्माता
पाठ विधि
- ▸शुक्रवार को श्री सूक्त के बाद लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करें
- ▸दीपावली पर विशेष पाठ
- ▸प्रत्येक नाम के साथ 'नमः' जोड़कर जप करें: 'श्रियै नमः, लक्ष्म्यै नमः...'
फलश्रुति (स्कंद पुराण)
लक्ष्मीसहस्रनाम स्तोत्रं यः पठेत् श्रद्धयान्वितः। सर्वसौभाग्यमाप्नोति लक्ष्मीः स्थिरा भवेद् गृहे॥' — जो श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके घर में लक्ष्मी स्थायी हो जाती हैं।





