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सहस्रनाम से जुड़े सभी प्रश्न(4)

सहस्रनाम पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव स्तोत्र

शिव सहस्रनाम का पाठ कैसे और कब करना चाहिए?

महाभारत (अनुशासन पर्व)/लिंग पुराण में वर्णित। कब: प्रातःकाल/संध्या, शिवरात्रि/सावन सोमवार। विधि: स्नान → शिवलिंग समक्ष → दीपक → एकाग्रचित्त पाठ (45-60 मिनट)। 11/21/40 दिन संकल्प। लाभ: पापनाश, मोक्ष, दीर्घायु, शत्रु नाश।

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मंदिर पूजा

मंदिर में सहस्रनाम अर्चना कैसे करवाएं?

सहस्रनाम अर्चना: 1000 नाम + 1000 पुष्प/अक्षत अर्पित। मुख्य: विष्णु (महाभारत), ललिता (ब्रह्माण्ड पुराण), शिव (शिवपुराण)। विधि: संकल्प → गणपति पूजन → 'ॐ [नाम] नमः' + पुष्प × 1000 → आरती। समय: 1.5-3 घंटे। घर पर भी सम्भव (पुस्तक + अक्षत)।

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स्तोत्र परिचय

लक्ष्मी सहस्त्रनाम क्या है?

लक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्र में देवी के 1000 नाम हैं — स्कंद पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में यह मिलता है। प्रमुख नाम हैं — श्री, रमा, पद्मा, इंदिरा, वसुंधरा, महालक्ष्मी, भुवनेश्वरी, मोक्षदायिनी। शुक्रवार को इसका पाठ लक्ष्मी को स्थायी करता है।

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गणेश पूजा

गणेश सहस्रनाम का पाठ कब करना चाहिए?

सर्वोत्तम: गणेश चतुर्थी, संकष्टी, बुधवार, दीपावली, नए कार्य आरंभ। गणेश पूजन (सिंदूर, दूर्वा, मोदक) → पाठ → आरती। फल: सर्व विघ्न नाश, मनोकामना, ग्रह शांति, मोक्ष। विकल्प: 108 नाम (अष्टोत्तर) या 12 नाम (द्वादश) भी पर्याप्त।

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