विस्तृत उत्तर
ब्रह्म पुराण = अष्टादश महापुराणों में से एक, जिसमें श्राद्ध की अत्यंत विशद और सूक्ष्म परिभाषा प्रस्तुत की गई है।
### ब्रह्म पुराण की परिभाषा:
ब्रह्म पुराण के अनुसार श्राद्ध वह कर्म है जिसमें निम्न छः तत्त्वों का संगम हो:
1उचित काल
- ▸शास्त्र-निर्धारित समय (जैसे पितृ पक्ष, मध्याह्न, कुतुप मुहूर्त)।
2उचित पात्र
- ▸सुपात्र = श्रेष्ठ ब्राह्मण।
3पवित्र स्थान
- ▸शुद्ध और पवित्र स्थान।
4शास्त्रानुमोदित विधि
- ▸वेदों, पुराणों, स्मृतियों द्वारा निर्धारित विधि।
5पितरों को लक्ष्य
- ▸अपने पूर्वजों के निमित्त किया गया।
6श्रद्धापूर्वक अर्पण
- ▸श्रेष्ठ ब्राह्मणों को श्रद्धा के साथ दिया गया।
### सम्पूर्ण परिभाषा:
*'जो कुछ उचित काल, उचित पात्र एवं पवित्र स्थान के अनुसार शास्त्रानुमोदित विधि द्वारा पितरों को लक्ष्य करके श्रद्धापूर्वक श्रेष्ठ ब्राह्मणों को दिया जाता है, वह श्राद्ध है।'*
### विशेषता:
ब्रह्म पुराण की यह परिभाषा सिद्ध करती है कि श्राद्ध केवल अन्न देना नहीं — बल्कि काल + पात्र + स्थान + विधि + लक्ष्य + श्रद्धा का दिव्य संगम है।
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