विस्तृत उत्तर
कल्पतरु = सनातन धर्म का एक प्रमुख निबंध ग्रंथ, जिसमें श्राद्ध कर्म की अत्यंत स्पष्ट और प्रामाणिक परिभाषा दी गई है।
### कल्पतरु की पुष्टि:
कल्पतरु निबंध ग्रंथ में इस बात की पुष्टि की गई है कि 'पितरों के लाभ के लिए यज्ञिय वस्तुओं का त्याग और सुपात्र ब्राह्मणों द्वारा उसका ग्रहण ही प्रधान श्राद्ध कर्म है।'
### परिभाषा के दो मुख्य अंग:
1यज्ञिय वस्तुओं का त्याग
- ▸पितरों के लाभ के लिए शुद्ध, यज्ञ-योग्य पवित्र वस्तुओं का त्याग करना।
- ▸अर्थात् श्राद्ध 'त्याग' का कर्म है।
2सुपात्र ब्राह्मणों द्वारा ग्रहण
- ▸त्यागी गई वस्तुओं को योग्य, श्रेष्ठ ब्राह्मण ग्रहण करें।
- ▸सुपात्र ब्राह्मण = वेद-शास्त्र के ज्ञाता, सदाचारी।
### प्रधान श्राद्ध कर्म:
जब इन दोनों अंगों का संगम हो — त्याग (कर्ता द्वारा) + ग्रहण (सुपात्र ब्राह्मण द्वारा) — तब वह 'प्रधान श्राद्ध कर्म' कहलाता है।
### विशेषता:
कल्पतरु की परिभाषा यह सिद्ध करती है कि बिना योग्य ब्राह्मण के ग्रहण के, केवल त्याग करना अधूरा श्राद्ध है। त्याग + सुपात्र = पूर्ण श्राद्ध।
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