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श्राद्ध परिचय⏱ 2 मिनट पठन

मिताक्षरा के अनुसार श्राद्ध क्या है?

मिताक्षरा (याज्ञवल्क्य स्मृति की टीका) = 'पितरों का उद्देश्य करके उनके कल्याण एवं पारलौकिक तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र वस्तु/द्रव्य का परित्याग = श्राद्ध।

संक्षिप्त उत्तर

मिताक्षरा (याज्ञवल्क्य स्मृति की टीका) = 'पितरों का उद्देश्य करके उनके कल्याण एवं पारलौकिक तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र वस्तु/द्रव्य का परित्याग = श्राद्ध।' मूल भाव = पवित्र द्रव्य का त्याग।

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विस्तृत उत्तर

मिताक्षरा = महर्षि याज्ञवल्क्य की प्रसिद्ध 'याज्ञवल्क्य स्मृति' पर आधारित सुप्रसिद्ध टीका, जो धर्मशास्त्र की सबसे आधिकारिक व्याख्याओं में से एक मानी जाती है।

### मिताक्षरा की परिभाषा:

मिताक्षरा में श्राद्ध को परिभाषित करते हुए स्पष्ट किया गया है:

*'पितरों का उद्देश्य करके उनके कल्याण एवं पारलौकिक तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र वस्तु या द्रव्य का परित्याग करना ही श्राद्ध का वास्तविक स्वरूप है।'*

### परिभाषा के मुख्य तत्त्व:

1पितरों का उद्देश्य

  • ▸कर्म पितरों के निमित्त होना चाहिए।

2पितरों का कल्याण

  • ▸उनके लाभ और शुभता के लिए।

3पारलौकिक तृप्ति

  • ▸दूसरे लोक में उनकी तृप्ति का उद्देश्य।

4श्रद्धापूर्वक

  • ▸पूर्ण श्रद्धा और आस्तिकता के साथ।

5पवित्र वस्तु/द्रव्य

  • ▸शुद्ध और पवित्र सामग्री।

6परित्याग

  • ▸अपने अधिकार से उस वस्तु का त्याग करना।

### विशिष्टता:

मिताक्षरा की यह परिभाषा 'श्राद्ध' को 'त्याग' के दर्शन से जोड़ती है — अर्थात् श्राद्ध केवल देना नहीं, बल्कि पवित्र द्रव्य का पितरों के लिए परित्याग है। यह परिभाषा शास्त्र-संगत और दार्शनिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक मानी जाती है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

मिताक्षरा के अनुसार श्राद्ध क्या है को संदर्भ सहित समझें

मिताक्षरा के अनुसार श्राद्ध क्या है का सबसे सीधा सार यह है: मिताक्षरा (याज्ञवल्क्य स्मृति की टीका) = 'पितरों का उद्देश्य करके उनके कल्याण एवं पारलौकिक तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र वस्तु/द्रव्य का परित्याग = श्राद्ध।' मूल भाव =...

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श्राद्ध परिचय प्रश्नोत्तर
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