विस्तृत उत्तर
मिताक्षरा = महर्षि याज्ञवल्क्य की प्रसिद्ध 'याज्ञवल्क्य स्मृति' पर आधारित सुप्रसिद्ध टीका, जो धर्मशास्त्र की सबसे आधिकारिक व्याख्याओं में से एक मानी जाती है।
### मिताक्षरा की परिभाषा:
मिताक्षरा में श्राद्ध को परिभाषित करते हुए स्पष्ट किया गया है:
*'पितरों का उद्देश्य करके उनके कल्याण एवं पारलौकिक तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र वस्तु या द्रव्य का परित्याग करना ही श्राद्ध का वास्तविक स्वरूप है।'*
### परिभाषा के मुख्य तत्त्व:
1पितरों का उद्देश्य
- ▸कर्म पितरों के निमित्त होना चाहिए।
2पितरों का कल्याण
- ▸उनके लाभ और शुभता के लिए।
3पारलौकिक तृप्ति
- ▸दूसरे लोक में उनकी तृप्ति का उद्देश्य।
4श्रद्धापूर्वक
- ▸पूर्ण श्रद्धा और आस्तिकता के साथ।
5पवित्र वस्तु/द्रव्य
- ▸शुद्ध और पवित्र सामग्री।
6परित्याग
- ▸अपने अधिकार से उस वस्तु का त्याग करना।
### विशिष्टता:
मिताक्षरा की यह परिभाषा 'श्राद्ध' को 'त्याग' के दर्शन से जोड़ती है — अर्थात् श्राद्ध केवल देना नहीं, बल्कि पवित्र द्रव्य का पितरों के लिए परित्याग है। यह परिभाषा शास्त्र-संगत और दार्शनिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक मानी जाती है।
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