विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में सच्चे गुरु के लक्षण
- 1श्रोत्रिय — वेद/शास्त्र का ज्ञाता (मुंडकोपनिषद 1.2.12)।
- 2ब्रह्मनिष्ठ — ब्रह्म (ईश्वर) में स्थित, अनुभवी — केवल पुस्तकी ज्ञान नहीं।
- 3निर्लोभ — धन/यश/पद का लोभ नहीं। सरल जीवन।
- 4सदाचारी — कर्म और वचन में एकरूपता। जो कहे, वह करे।
- 5करुणामय — शिष्य के कल्याण की चिंता। धैर्य से सिखाए।
- 6शांत/जितेन्द्रिय — क्रोध, काम, लोभ पर नियंत्रण।
- 7शास्त्र प्रमाण — अपनी बात शास्त्र प्रमाण से सिद्ध करे (गीता 4.34)।
- 8स्वतंत्रता दे — अंधभक्ति न माँगे, विवेक विकसित करे।
विवेकचूड़ामणि (शंकराचार्य): सच्चा गुरु = शास्त्रज्ञ + ब्रह्मनिष्ठ + करुणामय + निष्काम।
गीता (4.34): 'तत्त्वदर्शी' = सत्य को जानने वाला — यही सच्चा गुरु।

