विस्तृत उत्तर
इन शास्त्रों के चार प्रमुख भाग (पाद) हैं — ज्ञान, योग, चर्या और क्रिया।
इनमें से 'क्रियापाद' में ही मंदिर निर्माण, मूर्ति लक्षण और प्राण-प्रतिष्ठा की विधियों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
आगम शास्त्र के कितने भाग हैं को संदर्भ सहित समझें
आगम शास्त्र के कितने भाग हैं का सबसे सीधा सार यह है: आगम शास्त्र के चार भाग (पाद) हैं: ज्ञान, योग, चर्या और क्रिया — प्राण प्रतिष्ठा की विधि 'क्रियापाद' में मिलती है।
आगम और तंत्र शास्त्र जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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शिवलिंग की स्थापना के लिए कौन से आगम प्रमाण हैं?
28 शैव आगम — विशेषतः कामिकागम और कारणागम — शिवलिंग की स्थापना और पूजा-पद्धति के सर्वोच्च प्रमाण हैं क्योंकि यह ज्ञान सीधे देवाधिदेव महादेव से प्रवाहित हुआ है।
प्राण प्रतिष्ठा की विधि आगम के किस भाग में है?
प्राण प्रतिष्ठा की विधि आगम के क्रियापाद में है; क्रियापाद में मंदिर निर्माण, मूर्ति लक्षण और प्राण-प्रतिष्ठा विधियों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
आगम शास्त्र क्या हैं?
आगम शास्त्र भगवान शिव और माता पार्वती के संवादों का दिव्य संकलन हैं — शिव ने पार्वती को जो रहस्य बताए वे 'आगम' कहलाए। इनके चार भाग हैं: ज्ञान, योग, चर्या और क्रिया।
प्राण प्रतिष्ठा की विधि किन ग्रंथों में मिलती है?
प्राण प्रतिष्ठा की प्रामाणिक विधि आगम और तंत्र शास्त्रों में मिलती है — ये शिव-पार्वती संवाद का दिव्य संकलन हैं। 28 शैव आगम (कामिकागम, कारणागम) इसके सर्वोच्च प्रमाण हैं।
त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश में कौन सबसे बड़ा?
इसका कोई एकमात्र उत्तर नहीं — शिव पुराण में शिव, विष्णु पुराण में विष्णु सर्वोच्च। समन्वित सिद्धांत: त्रिदेव एक ही ब्रह्म के तीन रूप (सृष्टि-स्थिति-संहार), कोई बड़ा-छोटा नहीं। स्कंद पुराण: 'शिव ही विष्णु, विष्णु ही शिव।'
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