विस्तृत उत्तर
अलग-अलग पुराणों में रसातल का मूल स्वरूप समान है, लेकिन क्रम, भू-प्रकृति और निवासियों के विवरण में कुछ सूक्ष्म भिन्नताएँ मिलती हैं। विद्वानों के अनुसार ये भिन्नताएँ विरोधाभासी नहीं, बल्कि कल्प भेद का परिणाम हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार रसातल छठा अधोलोक है और उसमें दिति और दनु के पुत्र, पणि, निवातकवच और कालेय रहते हैं। विष्णु पुराण में पृथ्वी के नीचे सात लोकों की सूची में अतल, वितल, निताल, गभस्तिमत्, महातल, सुतल और पाताल नाम मिलते हैं, और टीकाकारों के अनुसार गभस्तिमत् या निताल रसातल के दूसरे नाम माने गए हैं। ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण रसातल को छठा लोक मानते हैं और इसकी भूमि कंकड़-पत्थर युक्त बताते हैं। शिव पुराण में तारकासुर के वंशजों को रसातल के विशिष्ट क्षेत्रों से जोड़ा गया है। मत्स्य पुराण रसातल को ब्रह्मांडीय जल के भाग के रूप में चित्रित करता है जहाँ हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को छिपाया था।
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