विस्तृत उत्तर
प्राण-प्रतिष्ठा की प्रामाणिक विधि का स्रोत आगम और तंत्र शास्त्र हैं।
ये ग्रंथ स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती के मध्य हुए संवादों का दिव्य संकलन हैं। जिन रहस्यों को भगवान शिव ने अपनी शक्ति, माता पार्वती, को बताया, वे 'आगम' कहलाए।
विशेष रूप से 28 शैव आगम (जैसे कामिकागम, कारणागम) शिवलिंग की स्थापना और पूजा-पद्धति के सर्वोच्च प्रमाण हैं, क्योंकि यह ज्ञान सीधे देवाधिदेव महादेव से ही प्रवाहित हुआ है।





