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रामचरितमानस — बालकाण्ड⏱ 2 मिनट पठन

'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — शिवजी ने पार्वतीजी

शिवजी ने पार्वतीजी को श्रीहरि (राम) के सम्पूर्ण अवतार चरित सुनाने का निर्णय लिया।

संक्षिप्त उत्तर

शिवजी ने पार्वतीजी को श्रीहरि (राम) के सम्पूर्ण अवतार चरित सुनाने का निर्णय लिया। कहा — 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — वेद-शास्त्रों में गाये गये राम के सुन्दर चरित्र सुनो। राम अतर्क्य हैं — बुद्धि, मन, वाणी से नहीं समझे जा सकते।

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विस्तृत उत्तर

शिवजी ने पार्वतीजी को श्रीहरि (भगवान राम) के सुन्दर चरित्र — अर्थात् रामावतार की सम्पूर्ण कथा — सुनाने का निर्णय लिया।

चौपाई — 'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए। हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥'

इसका अर्थ — हे पार्वती! सुनो, वेद-शास्त्रोंने श्रीहरिके सुन्दर, विस्तृत और निर्मल चरित्रोंका गान किया है। हरिका अवतार जिस कारणसे होता है, वह कारण 'बस यही है' ऐसा नहीं कहा जा सकता (अनेकों कारण हो सकते हैं)।

आगे शिवजी ने कहा — 'राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी। तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना॥'

अर्थ — हे सयानी! सुनो, हमारा मत तो यह है कि बुद्धि, मन और वाणीसे श्रीरामचन्द्रजीकी तर्कना नहीं की जा सकती। तथापि संत, मुनि, वेद और पुराण — अपनी-अपनी बुद्धिके अनुसार जैसा कुछ कहते हैं (वही मैं तुमको सुनाता हूँ)।

यहीं से रामावतार के कारणों और फिर सम्पूर्ण रामकथा का आरम्भ होता है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

'सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए' — शिवजी ने पार्वतीजी को क्या सुनाने का निर्णय लिया को संदर्भ सहित समझें

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