विस्तृत उत्तर
पिशाच योनि प्रेत योनि से भी अधिक मलिन, तामसिक, हिंसक और नकारात्मक मानी जाती है। संस्कृत में पिशाच का शाब्दिक अर्थ है वह जो मांस, अर्थात पिशित, खाता है। महाभारत और अन्य पुराणों के अनुसार पिशाच वे आसुरी जीव हैं जो अंधकार में विचरण करते हैं, श्मशानों में निवास करते हैं, और मांस तथा मल-मूत्र का भक्षण करते हैं। वे अत्यंत मायावी होते हैं, इच्छानुसार रूप बदलने और अदृश्य होने में सक्षम होते हैं। उनका स्वरूप भयानक, उभरी हुई नसों वाला और लाल आँखों वाला बताया गया है।
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