विस्तृत उत्तर
बहुत से परिवारों में आज कुलदेवता की जानकारी लुप्त हो गई है। पहचान के उपाय इस प्रकार हैं।
सबसे पहले परिवार के बुजुर्गों से पूछें — दादा-दादी, बड़े चाचा, फूफा आदि को प्रायः पता होता है कि पूर्वज किस देवता की पूजा करते थे। पैतृक गांव जाएं — वहां का मुख्य मंदिर प्रायः कुलदेवता का होता है। गोत्र और जाति के आधार पर भी कुलदेवता पता लगाया जा सकता है — कुछ गोत्रों के निश्चित कुलदेवता होते हैं।
यदि किसी तरह पता न चले तो ज्योतिषी कुंडली देखकर इष्ट/कुलदेवता बता सकते हैं (विवादित पद्धति)। कुछ विद्वान कहते हैं कि ध्यान में जो देवता बार-बार दिखें या जिनसे विशेष लगाव हो वही कुलदेवता हो सकते हैं।
यदि बिल्कुल पता न चले तो गणेश जी या कुल की कुलदेवी (दुर्गा/काली/लक्ष्मी) को कुलदेवता मानकर पूजा शुरू करें — श्रद्धा से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं होती।


