विस्तृत उत्तर
दत्तात्रेय भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार हैं — तीन मुख और छह भुजाओं वाले। अत्रि ऋषि और माता अनसूया के पुत्र। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में विशेष पूजित।
पूजा विधि — गुरुवार या दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) विशेष। प्रातः स्नान कर दत्तात्रेय चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं। फूल, फल, नैवेद्य अर्पित करें। 'ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः' मंत्र 108 बार जपें। दत्त बावनी या गुरुचरित्र पाठ करें।
दत्तात्रेय गुरु तत्व के देवता हैं — उन्होंने प्रकृति के 24 तत्वों को अपना गुरु बनाया (पृथ्वी, जल, वायु, मधुमक्खी, मकड़ी आदि से सीखा)। इसलिए उनकी पूजा विशेषकर गुरु प्राप्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति के लिए की जाती है। औदुंबर (गूलर) वृक्ष के नीचे दत्त पूजा विशेष फलदायी।





