विस्तृत उत्तर
कुबेर को धन के देवता और यक्षों के राजा के रूप में पूजा जाता है। शिव के परम भक्त कुबेर को लंका का अधिपति बनाया गया था, बाद में रावण ने लंका छीन ली तो शिव ने कुबेर को अलकापुरी दी। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के साथ कुबेर पूजा का विशेष विधान है क्योंकि लक्ष्मी धन देती हैं और कुबेर उसे सुरक्षित रखते हैं।
पूजा विधि के लिए धनतेरस या दीपावली को उत्तर दिशा में कुबेर यंत्र या चित्र स्थापित करें। पीले फूल, पीली मिठाई, सोने या चांदी का सिक्का अर्पित करें। 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा' मंत्र का 108 बार जप करें। तिजोरी या पूजा स्थल में कुबेर यंत्र रखने से धन संरक्षण होता है।
ध्यान रखें कि कुबेर पूजा का अर्थ केवल धन मांगना नहीं बल्कि धन का सदुपयोग और दान करने की प्रेरणा भी है।





