विस्तृत उत्तर
नरसिंह भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं — आधे नर (मनुष्य) और आधे सिंह (शेर)। भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु के वध के लिए प्रकट हुए। शत्रु नाश, भय निवारण और रक्षा के देवता।
पूजा विधि — नरसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) विशेष दिन। उग्र देवता होने से सायंकाल पूजा शुभ (प्रकट = सायंकाल हुए — न दिन न रात)। नरसिंह चित्र या मूर्ति पर हल्दी, कुमकुम, पुष्प अर्पित करें। 'ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्।।' यह नरसिंह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है।
नरसिंह कवच (भागवत पुराण) पाठ भय और शत्रु से सबसे प्रभावी रक्षा। विशेषकर जो लोग भय, शत्रु, तंत्र या बुरी शक्ति से पीड़ित हैं उनके लिए नरसिंह पूजा अत्यंत लाभकारी।





