विस्तृत उत्तर
निष्काम कर्म = फल की इच्छा बिना कर्म; गृहस्थ = कठिन पर संभव।
गीता 2.47: 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' = कर्म करो, फल ईश्वर पर।
व्यावहारिक: नौकरी करो (पूरी मेहनत) पर promotion/salary = ईश्वर पर। बच्चों को पालो (सर्वश्रेष्ठ) पर 'मेरी इच्छा पूरी करें' = मोह। पत्नी/पति सेवा = प्रेम; बदले की अपेक्षा = सौदा। दान करो; प्रशंसा अपेक्षा नहीं।
संतुलन: planning करो (lazy मत बनो) पर result accept करो। 100% effort + 0% attachment = निष्काम कर्म। हनुमान = सर्वोत्तम उदाहरण (अपार कर्म, शून्य अहंकार)।





