विस्तृत उत्तर
पंचमहायज्ञ = गृहस्थ के 5 दैनिक कर्तव्य (मनुस्मृति 3.70):
- 1ब्रह्म यज्ञ (ऋषि ऋण): वेद/गीता/शास्त्र पढ़ना/पढ़ाना। आधुनिक: 10 मिनट गीता/धर्मग्रंथ पढ़ें।
- 2देव यज्ञ (देव ऋण): हवन/अग्निहोत्र। आधुनिक: दीपक + अगरबत्ती + प्रार्थना।
- 3पितृ यज्ञ (पितर ऋण): तर्पण/श्राद्ध। आधुनिक: माता-पिता/बुजुर्गों की सेवा।
- 4मनुष्य यज्ञ (मनुष्य ऋण): अतिथि सत्कार। आधुनिक: मेहमान सम्मान, गरीबों को भोजन।
- 5भूत यज्ञ (प्राणी ऋण): पशु-पक्षी सेवा। आधुनिक: कौवा/गाय/कुत्ते को रोटी, पक्षियों को दाना-पानी।
सरलतम: रोज़ = गीता पढ़ो + दीपक + माता-पिता सेवा + मेहमान + जानवरों को रोटी = पंचमहायज्ञ पूर्ण। 30 मिनट = 5 ऋण चुकते।

