विस्तृत उत्तर
गृहस्थ = चारों आश्रमों में श्रेष्ठ — मनुस्मृति (6.89): *'यथा वायुं समाश्रित्य वर्तन्ते सर्वजन्तवः, तथा गृहस्थमाश्रित्य वर्तन्ते सर्व आश्रमाः'* — जैसे सब प्राणी वायु पर निर्भर, वैसे सब आश्रम गृहस्थ पर।
क्यों श्रेष्ठ
- 1भरण-पोषण: ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी, संन्यासी = गृहस्थ से भिक्षा/भोजन। गृहस्थ = सबका पालक।
- 2पंचमहायज्ञ: देव/ऋषि/पितर/अतिथि/भूत = पांचों ऋण गृहस्थ चुकाता।
- 3संतान: वंश वृद्धि, संस्कार = गृहस्थ ही।
- 4दान: अन्नदान/विद्यादान/धनदान = गृहस्थ ही कर सकता।
- 5कर्मयोग: गीता: गृहस्थ = सबसे कठिन तपस्या — संसार में रहकर धर्म = सबसे बड़ा।
सार: हिमालय गुफा = आसान। परिवार+नौकरी+समाज में रहकर धर्म = असली तपस्या = गृहस्थ।



