विस्तृत उत्तर
गृहस्थ वैराग्य = घर छोड़ना नहीं; मोह छोड़ना। गीता 5.10: 'कमल पत्ते पर जल' — संसार में रहो, लिप्त मत हो।
कैसे: कर्तव्य पालन करो (पत्नी/बच्चे/माता-पिता) पर attachment कम करो। 'मेरा' कम बोलो — 'ईश्वर का' ज्यादा। सादा जीवन — अनावश्यक भोग कम। दान — जो है उसमें से दो = त्याग। प्रतिदिन 30 min ध्यान/जप = वैराग्य बीज। संग त्याग — बुरी संगत छोड़ो; सत्संग करो। मृत्यु चिंतन — 'सब यहीं रहेगा' = natural वैराग्य।
जनक राजा = गृहस्थ+विदेह (वैरागी)। राम = राजा+वैरागी। गृहस्थ वैराग्य = सर्वोच्च (सन्यास से कठिन)।





