विस्तृत उत्तर
तुलसी विवाह का अनुष्ठान करने का अधिकार प्रत्येक सनातनी को प्राप्त है। गृहस्थ आश्रम के लिए यह एक परम कल्याणकारी और पुण्यदायी कृत्य है।
विशेष रूप से वे दंपत्ति जो संतानहीन (नि:संतान) हैं अथवा जिन्हें कन्या-रत्न की प्राप्ति नहीं हुई है, उनके लिए तुलसी विवाह का अनुष्ठान अत्यंत अनुशंसित है।
शास्त्र वचन है कि जो व्यक्ति अपनी पुत्री के समान माता तुलसी का पूर्ण वात्सल्य के साथ पालन-पोषण कर श्री शालिग्राम जी के साथ उनका विवाह संपन्न करवाता है, उसे साक्षात् 'कन्यादान' का अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।





