विस्तृत उत्तर
मृत्यु = निश्चित; तैयारी = बुद्धिमत्ता (गीता 2.27)।
आध्यात्मिक: नियमित भक्ति/जप = अंतिम समय ईश्वर स्मरण natural। गीता 8.5-6: 'अंतिम समय जो स्मरण, वही गति।' इसलिए जीवनभर अभ्यास।
व्यावहारिक: वसीयत बनाएं (परिवार झगड़ा रोकें)। ऋण चुकाएं। क्षमा मांगें+दें (बोझ न रहे)। दान (यथाशक्ति)। संतान/परिवार = आत्मनिर्भर बनाएं।
गीता 2.22: 'शरीर बदलना = कपड़े बदलना।' मृत्यु = अंत नहीं; यात्रा। भय नहीं, तैयारी। कबीर: 'मरने से जग डरे, मोको आनंद आय।'
सबसे बड़ी तैयारी: अच्छे कर्म + ईश्वर स्मरण = daily। अंतिम क्षण = जीवन का reflection।





