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फल से जुड़े सभी प्रश्न(47)

फल पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 47 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मंत्र जप नियम

मंत्र जप में 108 बार से कम जप करने पर भी फल मिलता है या नहीं?

हां। 1 भी शुभ। 3/7/11/21/27/54 = शुभ संख्याएं। 'भगवान भाव गिनते, संख्या नहीं।' 1 भक्ति से > 108 बिना भक्ति। '0 से बेहतर = 1।' नियमित 11 > कभी-कभी 108।

#108#कम#फल
मंत्र जप नियम

मंत्र जप पूर्ण होने के बाद फल कब तक दिखता है?

तुरंत (काली), 40 दिन (अनुष्ठान), 3-6 मास (दैनिक), 1 वर्ष (गहन)। कारक: भक्ति, शुद्धता, प्रारब्ध, गुरु कृपा। 'निष्काम जप = सबसे तीव्र।' धैर्य अचूक।

#फल#समय#कब
शिव स्तोत्र

शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करने से क्या विशेष फल मिलता है?

पुष्पदंत रचित — पापनाश, भक्ति गहनता, ज्ञान वृद्धि, वाणी शुद्धि, मनोकामना पूर्ति। 43 श्लोक, प्रातः/संध्या में पाठ। 40 दिन नियमित पाठ से विशेष फल। सावन/शिवरात्रि पर विशेष।

#शिव महिम्न#पुष्पदंत#स्तोत्र
गीता ज्ञान

गीता का कौन सा अध्याय पढ़ने से कौन सा फल?

गीता महात्म्य (पद्म/वराह पुराण): प्रत्येक अध्याय का विशेष फल। 12वाँ (भक्ति) और 15वाँ (पुरुषोत्तम) विशेष महत्वपूर्ण। 18वाँ अध्याय = मोक्ष/शरणागति। सम्पूर्ण पाठ सर्वोत्तम। 'गीता सुगीता कर्तव्या' — गीता ही पर्याप्त।

#गीता अध्याय#फल#गीता महात्म्य
लोक

जम्बू नदी क्या है और कैसे बनती है?

जम्बूद्वीप के दिव्य जम्बू वृक्ष के हाथी-आकार के फल गिरकर फटते हैं। उनके रस से जम्बू नदी बनती है जिसे पीने वाले को रोग, बुढ़ापा और शोक नहीं होता।

#जम्बू नदी#जम्बू वृक्ष#फल
आधुनिक धर्म

बिना आस्था मंत्र जप से फल मिलता क्या?

आंशिक=हाँ(शारीरिक/मानसिक)। पूर्ण=श्रद्धा अनिवार्य। दवाई जैसे: बिना विश्वास=chemical effect, विश्वास+=तेज recovery। गीता: श्रद्धावान=ज्ञान। मंत्र स्वयं आस्था पैदा करता।

#आस्था#मंत्र#फल
मंत्र विधि

मंत्र जप का फल किसी को बताने से नष्ट हो जाता है क्या?

हां, परंपरा में मान्यता। कारण: अहंकार दोष, दृष्टि दोष (ईर्ष्या), ऊर्जा बिखराव। अथर्वशीर्ष: 'अपात्र को न दें।' न बताएं: दीक्षा मंत्र, संख्या, अनुभव। बता सकते: सार्वजनिक मंत्र। सार: गोपनीयता = श्रेष्ठ।

#गोपनीयता#फल#बताना
स्तोत्र लाभ

कृष्ण चालीसा पढ़ने से क्या फल?

कृष्ण कृपा, शांति, प्रेम, संतान/विवाह सुख, बुद्धि। बुधवार/एकादशी/जन्माष्टमी। माखन-मिश्री भोग। कृष्ण भक्त/विवाह/संतान कामना।

#कृष्ण चालीसा#फल#भक्ति
शिवभक्ति

शिवभक्त के दर्शन से क्या फल मिलता है?

शिवभक्तों के दर्शनमात्र से प्राणियों को स्वर्ग आदि लोक सहज सुलभ हो जाते हैं।

#शिवभक्त#दर्शन#स्वर्ग
पाशुपत योग

पाशुपत योग प्राप्त करने से क्या फल मिला?

पाशुपत योग प्राप्त करने से शिष्य और प्रशिष्य शिवलोक के अधिकारी हुए।

#पाशुपत योग#शिवलोक#शिष्य
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रद्धा क्यों जरूरी है?

श्रद्धा इसलिए जरूरी है क्योंकि गुरु वचन में विश्वास और स्थिर मन के बिना कथा श्रवण का पूरा फल नहीं मिलता।

#श्रद्धा#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण कैसे जन्मे?

धुंधुली द्वारा संन्यासी का फल गाय को खिलाने के तीन महीने बाद गाय से मनुष्याकार दिव्य बालक उत्पन्न हुआ; वही गोकर्ण थे।

#गोकर्ण#जन्म#गाय
श्रीमद्भागवत

गाय को फल क्यों खिलाया गया?

धुंधुली ने फल स्वयं न खाकर अपनी बहन की सलाह पर परीक्षा के लिये गाय को खिला दिया, जिससे बाद में गोकर्ण जन्मे।

#गाय#फल#धुंधुली
श्रीमद्भागवत

धुंधुली ने पति से क्या झूठ बोला?

धुंधुली ने फल नहीं खाया, पर आत्मदेव के पूछने पर झूठ बोल दिया कि उसने फल खा लिया है।

#धुंधुली#झूठ#आत्मदेव
श्रीमद्भागवत

धुंधुली को गर्भ से डर क्यों लगा?

धुंधुली को गर्भ से शरीर कमजोर होने, घर का काम रुकने, प्रसव-पीड़ा, नियमों और बाल-पालन के कष्ट का डर लगा।

#धुंधुली#गर्भ#प्रसव
श्रीमद्भागवत

धुंधुली ने फल क्यों नहीं खाया?

धुंधुली ने गर्भ, प्रसव, नियमों और बाल-पालन के कष्टों से डरकर फल नहीं खाया।

#धुंधुली#फल#गर्भ
श्रीमद्भागवत

पुत्र पाने वाले फल के नियम क्या थे?

संन्यासी ने कहा कि फल खाने वाली स्त्री एक वर्ष तक सत्य, शौच, दया, दान और एक समय भोजन का नियम रखे।

#फल#पुत्र प्राप्ति#सत्य
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को फल किसने दिया?

आत्मदेव को पुत्र-प्राप्ति का फल उस संन्यासी योगी ने दिया, जिसने पहले उन्हें पुत्र-मोह छोड़ने को समझाया था।

#आत्मदेव#फल#संन्यासी
लोक

पितर पक्षी योनि में हों तो श्राद्ध कैसे मिलता है?

पक्षी योनि में श्राद्ध फल रूप में मिलता है।

#पक्षी योनि#श्राद्ध अन्न#फल
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न पक्षी योनि में क्या बनता है?

पक्षी योनि में श्राद्ध अन्न फल बन जाता है।

#श्राद्ध अन्न#पक्षी योनि#फल
श्री रुद्र-कवच-संहिता

विशेष कार्य-सिद्धि के लिए कितनी बार कवच का पाठ करना चाहिए?

उद्देश्य के अनुसार कवच की 3, 11, 21, 51 या 101 बार आवृत्ति की जा सकती है।

#जप संख्या#अनुष्ठान#फल
जीवन एवं मृत्यु

पाप का फल कहाँ मिलता है?

पाप का फल — इस लोक में (रोग-दुर्भाग्य), यमलोक में (लेखा-दंड निर्णय), नरक में (विशिष्ट यातना) और अगले जन्म में (अधम योनि)। पाप के फल से कोई स्थान मुक्त नहीं।

#पाप#फल#स्थान
जीवन एवं मृत्यु

पाप का फल कब मिलता है?

पाप का फल — इसी जन्म में (दुर्भाग्य-रोग), मृत्यु के तुरंत बाद (यमलोक में लेखा), नरक में (दंड-भोग) और अगले जन्म में। 'बिना भोगे कर्म का फल करोड़ों कल्पों में भी नष्ट नहीं होता।'

#पाप#फल#समय
जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प का श्रवण क्यों करना चाहिए?

प्रेतकल्प का श्रवण करना चाहिए — पापों से मुक्ति, मृत आत्मा को सद्गति, विष्णु-प्रदत्त ज्ञान की प्राप्ति, प्रेतत्व से बचाव और परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान के लिए।

#प्रेतकल्प#श्रवण#फल
जीवन एवं मृत्यु

दान का फल कैसे घटता है?

दान का फल घटता है — अहंकार और दिखावे से, अपात्र को देने से, दान के बाद पछताने से, प्रतिफल की आशा से और दान का बखान करने से। 'सात्विक दान' ही अक्षय है।

#दान#फल#कमी
जीवन एवं मृत्यु

दान का फल कैसे बढ़ता है?

दान का फल बढ़ता है — पुण्यकाल (ग्रहण, संक्रांति, पितृपक्ष) में, तीर्थ में (एक गाय = एक लाख का फल), मृत्युकाल में (हजारगुना), सत्पात्र को और श्रद्धापूर्वक देने से।

#दान#फल#पुण्यकाल
जीवन एवं मृत्यु

दान का फल किस प्रकार मिलता है?

दान का फल मिलने के तरीके — यममार्ग पर दान 'आगे-आगे उपस्थित होता है', कर्म के रूप में जीव के साथ जाता है, सूक्ष्म रूप में पितरों तक पहुँचता है, तत्काल और अक्षय है। पुण्यकाल में गुणित होता है।

#दान#फल#कर्म नियम
जीवन एवं मृत्यु

श्राद्ध का फल किसे मिलता है?

श्राद्ध का फल — पितरों को (तृप्ति-मुक्ति), कर्ता को (आशीर्वाद-पितृदोष मुक्ति), परिवार को (सुख-समृद्धि) और ब्राह्मण को (तृप्ति) मिलता है। श्राद्ध से तीनों लोकों के प्राणी संतुष्ट होते हैं।

#श्राद्ध#फल#पितर
जीवन एवं मृत्यु

दान का फल कब मिलता है?

दान का फल — यममार्ग पर तत्काल (भोजन-जल मिलना), मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति में, अगले जन्म में समृद्धि में और पुण्यकाल में दोगुना-हजारगुना। 'कर्म का फल अवश्य मिलता है' — यही गरुड़ पुराण का वचन है।

#दान#फल#समय
जीवन एवं मृत्यु

दान का फल किसे मिलता है?

दान का फल दाता को (पाप-नाश, स्वर्ग), प्रेत-पितरों को (तृप्ति-मुक्ति) और तीनों लोकों को मिलता है। 'भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्गलोक के निवासी सभी दान से संतुष्ट होते हैं।'

#दान#फल#दाता
गृहस्थ धर्म

महादान कौन से हैं फल क्या

10 महादान: गो/भूमि/तिल/स्वर्ण/घी/वस्त्र/धान्य/गुड़/रजत/लवण। गोदान=वैतरणी पार। अन्नदान=सबसे बड़ा। विद्या+अभय=सर्वोपरि। भाव>मात्रा। गीता: 'दातव्यम्'।

#महादान#दान#फल
आधुनिक धर्म प्रश्न

मोबाइल मंत्र सुनने से जप फल मिलता क्या

सुनना=पुण्य (श्रवण शास्त्रीय); पर जप>सुनना (वाणी+श्वास+एकाग्रता)। व्यस्त=सुनें; पूजा=जपें। सुनना>कुछ नहीं। जपना>सुनना। मोबाइल=माध्यम; भक्ति=मूल।

#मोबाइल#मंत्र#सुनना
स्तोत्र एवं पाठ

शिव महिम्न स्तोत्र पाठ से क्या फल

पुष्पदंत गंधर्व रचित; 43 श्लोक। शिव कृपा, पाप नाश, भक्ति, ज्ञान, भय निवारण, मोक्ष। सोमवार/शिवरात्रि। ~20-25 min।

#शिव महिम्न#स्तोत्र#पुष्पदंत
व्रत विधि

हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने का क्या विशेष फल है?

हरतालिका निर्जला: पार्वती तप अनुसरण, अखण्ड सौभाग्य (करवा चौथ से कठिन=फल अधिक), शिव-पार्वती कृपा (दाम्पत्य+संतान), पापक्षय, अगले जन्म सौभाग्य। स्वास्थ्य सर्वोपरि — जल छूट।

#हरतालिका तीज#निर्जला#फल
त्योहार पूजा

छठ पूजा में कौन कौन से फल अर्पित करने चाहिए?

छठ फल: केला, नारियल, गन्ना, सुथनी (अनिवार्य)। सीताफल, सेब, संतरा, अमरूद, नींबू। + ठेकुआ, चावल, पान। बाँस सूप। ताजा-शुद्ध।

#छठ पूजा#फल#अर्घ्य
गणेश उपासना

गणेश जी को कौन से फल प्रिय हैं

गणेश प्रिय फल: केला (सर्वप्रिय, अनिवार्य), जामुन, अनार, सेब, आम, बेर, नारियल, अमरूद। मोदक = सबसे प्रिय भोग। विषम संख्या (1/3/5/7)। 5 प्रकार के फल (चतुर्थी)। ताज़े, शुद्ध, बिना कीड़े।

#गणेश#फल#केला
शिव पूजा

शिव पूजा से क्या लाभ होते हैं?

शिव पूजा लाभ: पाप-नाश ('शिवपूजाकरो नित्यं पापं नश्यति')। रोग-निवारण (वैद्यनाथ)। धन-समृद्धि। संतान-प्राप्ति। ग्रह-दोष शांति (शनि, राहु, केतु)। शत्रु-नाश। मोक्ष। परिवार-रक्षा। स्कंद पुराण: नित्य शिव-आराधना = निश्चित मुक्ति।

#शिव पूजा#लाभ#फल
शिव पूजा

रुद्राभिषेक से क्या लाभ होते हैं?

रुद्राभिषेक लाभ: शिव पुराण — 'सर्वान् कामान् प्राप्नोति।' द्रव्य-फल: दूध=पुत्र, घी=मोक्ष, शहद=वाक्-सिद्धि, गंगाजल=मोक्ष+पितृ-शांति। सामान्य: ग्रह-दोष शांति, रोग-निवारण, संतान, समृद्धि, शत्रु-शांति। एकादश रुद्राभिषेक > लघु रुद्र > महा रुद्र (शक्ति-क्रम)।

#रुद्राभिषेक#लाभ#फल
शिव पूजा

जलाभिषेक से क्या लाभ होते हैं?

जलाभिषेक लाभ: पाप-नाश (शिव पुराण: 'जलाभिषेकेण पापं नश्यति')। रोग-निवारण (जल = सोम-तत्त्व)। मनोकामना-पूर्ति (स्कंद पुराण)। ग्रह-शांति (शनि/राहु/केतु)। पितृ-तर्पण। मोक्ष (लिंग पुराण: शिव-लोक प्राप्ति)।

#जलाभिषेक#लाभ#फल
जप आहार

मंत्र जप के दौरान क्या खाना चाहिए?

जप में आहार: फल-दूध सर्वोत्तम, सादा सात्विक भोजन। वर्जित: प्याज-लहसुन, मांसाहार, मद्य, बासी भोजन। पुरश्चरण में एकभुक्त। जप से 2 घंटे पहले भारी भोजन नहीं। खाली पेट या फलाहार बाद — जप सर्वोत्तम।

#आहार#सात्विक#फल
मनोकामना

मंत्र जप से मनोकामना कैसे पूरी होती है?

मनोकामना कैसे: सही मंत्र चुनें (लक्ष्मी/महामृत्युंजय/गणेश)। जप से पहले स्पष्ट संकल्प। नित्य बिना नागा जप। फल भगवान को समर्पित। गीता 9.22: 'अनन्य भक्ति से उपासना करने वाले का योग-क्षेम भगवान स्वयं करते हैं।'

#मनोकामना#कामना#फल
ध्यान महत्व

पूजा के दौरान ध्यान क्यों जरूरी है?

ध्यान क्यों जरूरी: भागवत — 'बिना भक्ति-ध्यान के पूजा शव जैसी।' ध्यान पूजा का प्राण है — विधि नहीं, रिश्ता बनाता है। उपाय: पूजा से पहले 2 मिनट शांत बैठें, मंत्र बोलते समय अर्थ पर ध्यान दें, मूर्ति को ध्यान से देखें।

#ध्यान#महत्व#एकाग्रता
तंत्र सिद्धि

तंत्र साधना से सिद्धि कैसे मिलती है?

तंत्र सिद्धि के पाँच अंग: गुरु कृपा, देव कृपा, पुरश्चरण, श्रद्धा और नित्यता। सिद्धि का क्रम: मंत्र स्थापना → जागृति (अजपा जप) → सिद्धि। संकेत: गहरी शांति, स्वप्न दर्शन, स्वतः जप। महानिर्वाण तंत्र: 'श्रद्धा से जपने पर सिद्धि में विलंब नहीं।'

#तंत्र सिद्धि#मंत्र सिद्धि#साधना
हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा रोज पढ़ने से क्या होता है?

हनुमान चालीसा के नित्य पाठ से — रोग और पीड़ा नष्ट होती है, भूत-प्रेत दूर रहते हैं, शनि पीड़ा कम होती है, मानसिक बल और साहस बढ़ता है, और राम जी की कृपा प्राप्त होती है। मंगलवार-शनिवार को 3 या 7 बार पाठ विशेष फलदायी है।

#हनुमान चालीसा#फल#लाभ
स्तोत्र लाभ

रामचरितमानस पाठ करने से क्या फल?

7 कांड=7 फल: बालकांड=संतान/विवाह, अयोध्या=परिवार, अरण्य=शत्रु नाश, किष्किंधा=मित्रता, सुंदर=बाधा नाश, लंका=विजय, उत्तर=मोक्ष। 9 दिन पारायण=सर्वोत्तम।

#रामचरितमानस#पाठ#फल
गीता दर्शन

गीता में कर्म का सिद्धांत क्या है?

गीता का कर्म-सिद्धांत (2/47) कहता है — कर्म करो, फल की इच्छा मत करो। निष्काम कर्म, ईश्वर-अर्पण भाव और स्वधर्म-पालन — ये गीता के कर्मयोग के तीन स्तंभ हैं।

#कर्म#निष्काम कर्म#कर्मयोग
मंत्र जप ज्ञान

मंत्र जप का फल किसी और को अर्पित कर सकते हैं क्या?

हां। संकल्प: '[व्यक्ति] कल्याण हेतु।' जीवित/दिवंगत/सम्पूर्ण विश्व। 'पुण्य दान' = मान्य (हिंदू+बौद्ध)। अर्पित = पुण्य बढ़ता (क्षीण नहीं)। निःस्वार्थ = अधिक।

#फल#अर्पित#दूसरे
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