मंत्र जप नियममंत्र जप में 108 बार से कम जप करने पर भी फल मिलता है या नहीं?हां। 1 भी शुभ। 3/7/11/21/27/54 = शुभ संख्याएं। 'भगवान भाव गिनते, संख्या नहीं।' 1 भक्ति से > 108 बिना भक्ति। '0 से बेहतर = 1।' नियमित 11 > कभी-कभी 108।#108#कम#फल
मंत्र जप नियममंत्र जप पूर्ण होने के बाद फल कब तक दिखता है?तुरंत (काली), 40 दिन (अनुष्ठान), 3-6 मास (दैनिक), 1 वर्ष (गहन)। कारक: भक्ति, शुद्धता, प्रारब्ध, गुरु कृपा। 'निष्काम जप = सबसे तीव्र।' धैर्य अचूक।#फल#समय
शिव स्तोत्रशिव महिम्न स्तोत्र का पाठ करने से क्या विशेष फल मिलता है?पुष्पदंत रचित — पापनाश, भक्ति गहनता, ज्ञान वृद्धि, वाणी शुद्धि, मनोकामना पूर्ति। 43 श्लोक, प्रातः/संध्या में पाठ। 40 दिन नियमित पाठ से विशेष फल। सावन/शिवरात्रि पर विशेष।#शिव महिम्न#पुष्पदंत#स्तोत्र
गीता ज्ञानगीता का कौन सा अध्याय पढ़ने से कौन सा फल?गीता महात्म्य (पद्म/वराह पुराण): प्रत्येक अध्याय का विशेष फल। 12वाँ (भक्ति) और 15वाँ (पुरुषोत्तम) विशेष महत्वपूर्ण। 18वाँ अध्याय = मोक्ष/शरणागति। सम्पूर्ण पाठ सर्वोत्तम। 'गीता सुगीता कर्तव्या' — गीता ही पर्याप्त।#गीता अध्याय#फल#गीता महात्म्य
लोकजम्बू नदी क्या है और कैसे बनती है?जम्बूद्वीप के दिव्य जम्बू वृक्ष के हाथी-आकार के फल गिरकर फटते हैं। उनके रस से जम्बू नदी बनती है जिसे पीने वाले को रोग, बुढ़ापा और शोक नहीं होता।#जम्बू नदी#जम्बू वृक्ष#फल
आधुनिक धर्मबिना आस्था मंत्र जप से फल मिलता क्या?आंशिक=हाँ(शारीरिक/मानसिक)। पूर्ण=श्रद्धा अनिवार्य। दवाई जैसे: बिना विश्वास=chemical effect, विश्वास+=तेज recovery। गीता: श्रद्धावान=ज्ञान। मंत्र स्वयं आस्था पैदा करता।#आस्था#मंत्र#फल
मंत्र विधिमंत्र जप का फल किसी को बताने से नष्ट हो जाता है क्या?हां, परंपरा में मान्यता। कारण: अहंकार दोष, दृष्टि दोष (ईर्ष्या), ऊर्जा बिखराव। अथर्वशीर्ष: 'अपात्र को न दें।' न बताएं: दीक्षा मंत्र, संख्या, अनुभव। बता सकते: सार्वजनिक मंत्र। सार: गोपनीयता = श्रेष्ठ।#गोपनीयता#फल#बताना
स्तोत्र लाभकृष्ण चालीसा पढ़ने से क्या फल?कृष्ण कृपा, शांति, प्रेम, संतान/विवाह सुख, बुद्धि। बुधवार/एकादशी/जन्माष्टमी। माखन-मिश्री भोग। कृष्ण भक्त/विवाह/संतान कामना।#कृष्ण चालीसा#फल#भक्ति
लोकपितर पक्षी योनि में हों तो श्राद्ध कैसे मिलता है?पक्षी योनि में श्राद्ध फल रूप में मिलता है।#पक्षी योनि#श्राद्ध अन्न#फल
मरणोपरांत आत्मा यात्राश्राद्ध अन्न पक्षी योनि में क्या बनता है?पक्षी योनि में श्राद्ध अन्न फल बन जाता है।#श्राद्ध अन्न#पक्षी योनि#फल
श्री रुद्र-कवच-संहिताविशेष कार्य-सिद्धि के लिए कितनी बार कवच का पाठ करना चाहिए?उद्देश्य के अनुसार कवच की 3, 11, 21, 51 या 101 बार आवृत्ति की जा सकती है।#जप संख्या#अनुष्ठान#फल
जीवन एवं मृत्युपाप का फल कहाँ मिलता है?पाप का फल — इस लोक में (रोग-दुर्भाग्य), यमलोक में (लेखा-दंड निर्णय), नरक में (विशिष्ट यातना) और अगले जन्म में (अधम योनि)। पाप के फल से कोई स्थान मुक्त नहीं।#पाप#फल#स्थान
जीवन एवं मृत्युपाप का फल कब मिलता है?पाप का फल — इसी जन्म में (दुर्भाग्य-रोग), मृत्यु के तुरंत बाद (यमलोक में लेखा), नरक में (दंड-भोग) और अगले जन्म में। 'बिना भोगे कर्म का फल करोड़ों कल्पों में भी नष्ट नहीं होता।'#पाप#फल#समय
जीवन एवं मृत्युप्रेतकल्प का श्रवण क्यों करना चाहिए?प्रेतकल्प का श्रवण करना चाहिए — पापों से मुक्ति, मृत आत्मा को सद्गति, विष्णु-प्रदत्त ज्ञान की प्राप्ति, प्रेतत्व से बचाव और परिजनों को कर्तव्य-ज्ञान के लिए।#प्रेतकल्प#श्रवण#फल
जीवन एवं मृत्युदान का फल कैसे घटता है?दान का फल घटता है — अहंकार और दिखावे से, अपात्र को देने से, दान के बाद पछताने से, प्रतिफल की आशा से और दान का बखान करने से। 'सात्विक दान' ही अक्षय है।#दान#फल#कमी
जीवन एवं मृत्युदान का फल कैसे बढ़ता है?दान का फल बढ़ता है — पुण्यकाल (ग्रहण, संक्रांति, पितृपक्ष) में, तीर्थ में (एक गाय = एक लाख का फल), मृत्युकाल में (हजारगुना), सत्पात्र को और श्रद्धापूर्वक देने से।#दान#फल#पुण्यकाल
जीवन एवं मृत्युदान का फल किस प्रकार मिलता है?दान का फल मिलने के तरीके — यममार्ग पर दान 'आगे-आगे उपस्थित होता है', कर्म के रूप में जीव के साथ जाता है, सूक्ष्म रूप में पितरों तक पहुँचता है, तत्काल और अक्षय है। पुण्यकाल में गुणित होता है।#दान#फल#कर्म नियम
जीवन एवं मृत्युश्राद्ध का फल किसे मिलता है?श्राद्ध का फल — पितरों को (तृप्ति-मुक्ति), कर्ता को (आशीर्वाद-पितृदोष मुक्ति), परिवार को (सुख-समृद्धि) और ब्राह्मण को (तृप्ति) मिलता है। श्राद्ध से तीनों लोकों के प्राणी संतुष्ट होते हैं।#श्राद्ध#फल#पितर
जीवन एवं मृत्युदान का फल कब मिलता है?दान का फल — यममार्ग पर तत्काल (भोजन-जल मिलना), मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति में, अगले जन्म में समृद्धि में और पुण्यकाल में दोगुना-हजारगुना। 'कर्म का फल अवश्य मिलता है' — यही गरुड़ पुराण का वचन है।#दान#फल#समय
जीवन एवं मृत्युदान का फल किसे मिलता है?दान का फल दाता को (पाप-नाश, स्वर्ग), प्रेत-पितरों को (तृप्ति-मुक्ति) और तीनों लोकों को मिलता है। 'भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्गलोक के निवासी सभी दान से संतुष्ट होते हैं।'#दान#फल#दाता
गृहस्थ धर्ममहादान कौन से हैं फल क्या10 महादान: गो/भूमि/तिल/स्वर्ण/घी/वस्त्र/धान्य/गुड़/रजत/लवण। गोदान=वैतरणी पार। अन्नदान=सबसे बड़ा। विद्या+अभय=सर्वोपरि। भाव>मात्रा। गीता: 'दातव्यम्'।#महादान#दान#फल
आधुनिक धर्म प्रश्नमोबाइल मंत्र सुनने से जप फल मिलता क्यासुनना=पुण्य (श्रवण शास्त्रीय); पर जप>सुनना (वाणी+श्वास+एकाग्रता)। व्यस्त=सुनें; पूजा=जपें। सुनना>कुछ नहीं। जपना>सुनना। मोबाइल=माध्यम; भक्ति=मूल।#मोबाइल#मंत्र#सुनना
स्तोत्र एवं पाठशिव महिम्न स्तोत्र पाठ से क्या फलपुष्पदंत गंधर्व रचित; 43 श्लोक। शिव कृपा, पाप नाश, भक्ति, ज्ञान, भय निवारण, मोक्ष। सोमवार/शिवरात्रि। ~20-25 min।#शिव महिम्न#स्तोत्र#पुष्पदंत
व्रत विधिहरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने का क्या विशेष फल है?हरतालिका निर्जला: पार्वती तप अनुसरण, अखण्ड सौभाग्य (करवा चौथ से कठिन=फल अधिक), शिव-पार्वती कृपा (दाम्पत्य+संतान), पापक्षय, अगले जन्म सौभाग्य। स्वास्थ्य सर्वोपरि — जल छूट।#हरतालिका तीज#निर्जला#फल
त्योहार पूजाछठ पूजा में कौन कौन से फल अर्पित करने चाहिए?छठ फल: केला, नारियल, गन्ना, सुथनी (अनिवार्य)। सीताफल, सेब, संतरा, अमरूद, नींबू। + ठेकुआ, चावल, पान। बाँस सूप। ताजा-शुद्ध।#छठ पूजा#फल#अर्घ्य
गणेश उपासनागणेश जी को कौन से फल प्रिय हैंगणेश प्रिय फल: केला (सर्वप्रिय, अनिवार्य), जामुन, अनार, सेब, आम, बेर, नारियल, अमरूद। मोदक = सबसे प्रिय भोग। विषम संख्या (1/3/5/7)। 5 प्रकार के फल (चतुर्थी)। ताज़े, शुद्ध, बिना कीड़े।#गणेश#फल#केला
शिव पूजाशिव पूजा से क्या लाभ होते हैं?शिव पूजा लाभ: पाप-नाश ('शिवपूजाकरो नित्यं पापं नश्यति')। रोग-निवारण (वैद्यनाथ)। धन-समृद्धि। संतान-प्राप्ति। ग्रह-दोष शांति (शनि, राहु, केतु)। शत्रु-नाश। मोक्ष। परिवार-रक्षा। स्कंद पुराण: नित्य शिव-आराधना = निश्चित मुक्ति।#शिव पूजा#लाभ#फल
शिव पूजारुद्राभिषेक से क्या लाभ होते हैं?रुद्राभिषेक लाभ: शिव पुराण — 'सर्वान् कामान् प्राप्नोति।' द्रव्य-फल: दूध=पुत्र, घी=मोक्ष, शहद=वाक्-सिद्धि, गंगाजल=मोक्ष+पितृ-शांति। सामान्य: ग्रह-दोष शांति, रोग-निवारण, संतान, समृद्धि, शत्रु-शांति। एकादश रुद्राभिषेक > लघु रुद्र > महा रुद्र (शक्ति-क्रम)।#रुद्राभिषेक#लाभ#फल
शिव पूजाजलाभिषेक से क्या लाभ होते हैं?जलाभिषेक लाभ: पाप-नाश (शिव पुराण: 'जलाभिषेकेण पापं नश्यति')। रोग-निवारण (जल = सोम-तत्त्व)। मनोकामना-पूर्ति (स्कंद पुराण)। ग्रह-शांति (शनि/राहु/केतु)। पितृ-तर्पण। मोक्ष (लिंग पुराण: शिव-लोक प्राप्ति)।#जलाभिषेक#लाभ#फल
जप आहारमंत्र जप के दौरान क्या खाना चाहिए?जप में आहार: फल-दूध सर्वोत्तम, सादा सात्विक भोजन। वर्जित: प्याज-लहसुन, मांसाहार, मद्य, बासी भोजन। पुरश्चरण में एकभुक्त। जप से 2 घंटे पहले भारी भोजन नहीं। खाली पेट या फलाहार बाद — जप सर्वोत्तम।#आहार#सात्विक#फल
मनोकामनामंत्र जप से मनोकामना कैसे पूरी होती है?मनोकामना कैसे: सही मंत्र चुनें (लक्ष्मी/महामृत्युंजय/गणेश)। जप से पहले स्पष्ट संकल्प। नित्य बिना नागा जप। फल भगवान को समर्पित। गीता 9.22: 'अनन्य भक्ति से उपासना करने वाले का योग-क्षेम भगवान स्वयं करते हैं।'#मनोकामना#कामना#फल
ध्यान महत्वपूजा के दौरान ध्यान क्यों जरूरी है?ध्यान क्यों जरूरी: भागवत — 'बिना भक्ति-ध्यान के पूजा शव जैसी।' ध्यान पूजा का प्राण है — विधि नहीं, रिश्ता बनाता है। उपाय: पूजा से पहले 2 मिनट शांत बैठें, मंत्र बोलते समय अर्थ पर ध्यान दें, मूर्ति को ध्यान से देखें।#ध्यान#महत्व#एकाग्रता
तंत्र सिद्धितंत्र साधना से सिद्धि कैसे मिलती है?तंत्र सिद्धि के पाँच अंग: गुरु कृपा, देव कृपा, पुरश्चरण, श्रद्धा और नित्यता। सिद्धि का क्रम: मंत्र स्थापना → जागृति (अजपा जप) → सिद्धि। संकेत: गहरी शांति, स्वप्न दर्शन, स्वतः जप। महानिर्वाण तंत्र: 'श्रद्धा से जपने पर सिद्धि में विलंब नहीं।'#तंत्र सिद्धि#मंत्र सिद्धि#साधना
हनुमान चालीसाहनुमान चालीसा रोज पढ़ने से क्या होता है?हनुमान चालीसा के नित्य पाठ से — रोग और पीड़ा नष्ट होती है, भूत-प्रेत दूर रहते हैं, शनि पीड़ा कम होती है, मानसिक बल और साहस बढ़ता है, और राम जी की कृपा प्राप्त होती है। मंगलवार-शनिवार को 3 या 7 बार पाठ विशेष फलदायी है।#हनुमान चालीसा#फल#लाभ
स्तोत्र लाभरामचरितमानस पाठ करने से क्या फल?7 कांड=7 फल: बालकांड=संतान/विवाह, अयोध्या=परिवार, अरण्य=शत्रु नाश, किष्किंधा=मित्रता, सुंदर=बाधा नाश, लंका=विजय, उत्तर=मोक्ष। 9 दिन पारायण=सर्वोत्तम।#रामचरितमानस#पाठ#फल
गीता दर्शनगीता में कर्म का सिद्धांत क्या है?गीता का कर्म-सिद्धांत (2/47) कहता है — कर्म करो, फल की इच्छा मत करो। निष्काम कर्म, ईश्वर-अर्पण भाव और स्वधर्म-पालन — ये गीता के कर्मयोग के तीन स्तंभ हैं।#कर्म#निष्काम कर्म#कर्मयोग
मंत्र जप ज्ञानमंत्र जप का फल किसी और को अर्पित कर सकते हैं क्या?हां। संकल्प: '[व्यक्ति] कल्याण हेतु।' जीवित/दिवंगत/सम्पूर्ण विश्व। 'पुण्य दान' = मान्य (हिंदू+बौद्ध)। अर्पित = पुण्य बढ़ता (क्षीण नहीं)। निःस्वार्थ = अधिक।#फल#अर्पित#दूसरे