विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पाप के फल के विभिन्न स्थानों का वर्णन तीन स्तरों पर मिलता है।
मृत्युलोक में (इसी जीवन में) — गरुड़ पुराण में कहा गया है कि पापों का फल जीवन में भी मिलता है — रोग, दुर्भाग्य, व्यापार-हानि, गृह-कलह और अकाल मृत्यु के रूप में।
यमलोक में — मृत्यु के बाद आत्मा यमलोक पहुँचती है जहाँ चित्रगुप्त पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं और धर्मराज न्याय करते हैं।
नरक में — पाप के अनुसार विशिष्ट नरक मिलता है। 'चोरी, झूठ, बड़ों का अपमान और जीव-हत्या जैसे पापों के लिए अलग-अलग दंड निर्धारित हैं जैसे तामिस्रम्, अंधतामिस्रम् और रौरव नरक।'
अगले जन्म में — नरक-भोग के बाद अधम योनियों में जन्म। गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय में — 'जिस-जिस पाप से जो-जो चिह्न प्राप्त होते हैं और जिन-जिन योनियों में जीव जाते हैं' — इसका विस्तृत वर्णन है।
संक्षेप में — पाप का फल इस लोक, यमलोक, नरक और अगले जन्म — इन चार स्थानों पर मिलता है।





