विस्तृत उत्तर
जप के दौरान आहार नियम मंत्र महोदधि और भगवद् गीता में वर्णित हैं:
भगवद् गीता (17.8-10) — आहार तीन प्रकार
- ▸सात्विक (श्रेष्ठ): आयु, बल, स्वास्थ्य, सुख और प्रीति बढ़ाने वाले
- ▸राजसिक (मध्यम): तीखे, खट्टे, नमकीन — जप में कम उचित
- ▸तामसिक (निम्न): बासी, अशुद्ध, मांस — जप में वर्जित
जप काल में श्रेष्ठ आहार
- 1फल और दूध — सर्वोत्तम
- 2सादा अन्न — चावल, रोटी, दाल — बिना मसाले
- 3सात्विक सब्जियाँ — तोरी, लौकी, पालक
वर्जित
- 1प्याज, लहसुन — तामसिक, वर्जित
- 2मांसाहार
- 3मद्य, तंबाकू
- 4बासी भोजन
- 5अधिक मसाले
एकभुक्त
मंत्र महोदधि: पुरश्चरण काल में एकभुक्त (एक बार भोजन) — ऊर्जा जप में लगती है।
जप के तुरंत पहले
भारी भोजन के 2 घंटे बाद जप। खाली पेट या हल्के फलाहार के बाद — जप सर्वोत्तम।
आयुर्वेद
सात्विक आहार → सात्विक मन → एकाग्र जप।





