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जप आहार📜 मंत्र महोदधि — जप आहार, आयुर्वेद, भगवद् गीता (17.8-10) — आहार तप1 मिनट पठन

मंत्र जप के दौरान क्या खाना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

जप में आहार: फल-दूध सर्वोत्तम, सादा सात्विक भोजन। वर्जित: प्याज-लहसुन, मांसाहार, मद्य, बासी भोजन। पुरश्चरण में एकभुक्त। जप से 2 घंटे पहले भारी भोजन नहीं। खाली पेट या फलाहार बाद — जप सर्वोत्तम।

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विस्तृत उत्तर

जप के दौरान आहार नियम मंत्र महोदधि और भगवद् गीता में वर्णित हैं:

भगवद् गीता (17.8-10) — आहार तीन प्रकार

  • सात्विक (श्रेष्ठ): आयु, बल, स्वास्थ्य, सुख और प्रीति बढ़ाने वाले
  • राजसिक (मध्यम): तीखे, खट्टे, नमकीन — जप में कम उचित
  • तामसिक (निम्न): बासी, अशुद्ध, मांस — जप में वर्जित

जप काल में श्रेष्ठ आहार

  1. 1फल और दूध — सर्वोत्तम
  2. 2सादा अन्न — चावल, रोटी, दाल — बिना मसाले
  3. 3सात्विक सब्जियाँ — तोरी, लौकी, पालक

वर्जित

  1. 1प्याज, लहसुन — तामसिक, वर्जित
  2. 2मांसाहार
  3. 3मद्य, तंबाकू
  4. 4बासी भोजन
  5. 5अधिक मसाले

एकभुक्त

मंत्र महोदधि: पुरश्चरण काल में एकभुक्त (एक बार भोजन) — ऊर्जा जप में लगती है।

जप के तुरंत पहले

भारी भोजन के 2 घंटे बाद जप। खाली पेट या हल्के फलाहार के बाद — जप सर्वोत्तम।

आयुर्वेद

सात्विक आहार → सात्विक मन → एकाग्र जप।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र महोदधि — जप आहार, आयुर्वेद, भगवद् गीता (17.8-10) — आहार तप
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