विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान के फल मिलने की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन है।
यममार्ग पर प्रत्यक्ष — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में — 'पृथ्वी पर मनुष्यों के द्वारा जो-जो दान दिये जाते हैं, यमलोक के मार्ग में वे सभी आगे-आगे उपस्थित हो जाते हैं।' यह दान का सबसे प्रत्यक्ष और तत्काल फल है।
कर्म-वाहक के रूप में — गरुड़ पुराण का मूल सिद्धांत — 'केवल कर्म साथ जाते हैं।' दान एक कर्म है — यह जीव के साथ यमलोक तक जाता है और वहाँ फल देता है।
सूक्ष्म तरंगों के माध्यम से — दिया गया अन्न, जल, वस्त्र — इनका सूक्ष्म अंश प्रेत-पितरों तक पहुँचता है। 'विश्वदेव और अग्निश्रवा नामक दो दिव्य पितृ ये वस्तुएँ पितरों तक पहुँचाते हैं।'
तत्काल और अक्षय — गरुड़ पुराण में — 'अपने हाथ से दिया गया अल्प दान भी अक्षय होता है और उसका फल तत्काल प्राप्त होता है।'
गुणन के रूप में — पुण्यकाल में दिया गया दान गुणित होकर फलता है — संक्रांति में हजारगुना, ग्रहण में असंख्य गुना।





