विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में श्राद्ध के फल के विषय में बताया गया है कि यह एक साथ कई लोगों को लाभ देता है।
पितरों और प्रेतों को — श्राद्ध का सर्वप्रथम फल उन दिवंगत आत्माओं को मिलता है जिनके नाम पर श्राद्ध किया जाता है। वे तृप्त होते हैं, उन्हें शक्ति और गति मिलती है।
कर्ता को — जो श्राद्ध करता है उसे पितरों का आशीर्वाद मिलता है, पितृदोष से मुक्ति होती है और कुलवृद्धि होती है।
परिवार को — पितर प्रसन्न होकर परिवार को सुख, समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद देते हैं।
ब्राह्मण को — श्राद्ध में भोजन करने वाले और दान पाने वाले ब्राह्मण भी तृप्त होते हैं।
गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में कहा गया है — 'भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्गलोक के निवासी — मनुष्य, भूत-प्रेत तथा देवगण — दान से संतुष्ट होते हैं।' श्राद्ध भी एक प्रकार का दान ही है।
गरुड़ पुराण का सर्वोच्च संदेश — 'जब दूसरे के श्राद्ध से प्रेत की सद्गति हुई, तो पुत्र के श्राद्ध से पिता की मुक्ति तो निश्चित ही है।'





