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हनुमान चालीसा📜 हनुमान चालीसा — गोस्वामी तुलसीदास, वाल्मीकि रामायण, हनुमान पुराण3 मिनट पठन

हनुमान चालीसा रोज पढ़ने से क्या होता है?

संक्षिप्त उत्तर

हनुमान चालीसा के नित्य पाठ से — रोग और पीड़ा नष्ट होती है, भूत-प्रेत दूर रहते हैं, शनि पीड़ा कम होती है, मानसिक बल और साहस बढ़ता है, और राम जी की कृपा प्राप्त होती है। मंगलवार-शनिवार को 3 या 7 बार पाठ विशेष फलदायी है।

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विस्तृत उत्तर

हनुमान चालीसा के नित्य पाठ के फल का वर्णन स्वयं तुलसीदास जी ने चालीसा में किया है और हनुमान पुराण में भी इसका विस्तार मिलता है:

हनुमान चालीसा का परिचय

  • रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास जी (16वीं शताब्दी)
  • भाषा: अवधी
  • कुल चौपाइयाँ: 40 (चालीसा = 40)
  • दोहे: 2 (आरंभ में 1, अंत में 1)
  • स्रोत: वाल्मीकि रामायण और अध्यात्म रामायण की घटनाओं पर आधारित

नित्य पाठ के फल (तुलसीदास जी के शब्दों में — चालीसा से)

  1. 1सभी कष्टों से मुक्ति:

> 'नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥'

— निरंतर जप से सभी रोग और पीड़ाएं नष्ट होती हैं।

  1. 1भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा:

> 'भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥'

— हनुमान जी का नाम सुनते ही भूत-पिशाच दूर भाग जाते हैं।

  1. 1राम जी की कृपा:

> 'तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥'

— हनुमान भजन से राम जी की कृपा मिलती है और जन्म-जन्मांतर के दुख दूर होते हैं।

  1. 1मृत्यु के बाद राम लोक:

> 'अंत काल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥'

— जीवन के अंत में राम जी के धाम में स्थान।

  1. 1शनि और नवग्रह कष्ट निवारण:

> 'नासे ग्रह पीड़ा सभी की। परम शांति पावे जन उसकी॥'

व्यावहारिक लाभ (नित्य पाठ से)

  1. 1मानसिक शक्ति: हनुमान जी 'चिरंजीवी' और 'बलिष्ठ' हैं — उनका नाम लेने से साहस और मनोबल बढ़ता है
  2. 2भय नाश: किसी भी प्रकार का भय — अकारण, शत्रु भय, रात्रि भय — दूर होता है
  3. 3शनि पीड़ा निवारण: हनुमान जी ने शनिदेव को वश में किया था — शनिवार को चालीसा पाठ शनि दोष घटाता है
  4. 4बल और स्वास्थ्य: 'बाहु बल सब से श्रेष्ठ करि मानो' — हनुमान जी की उपासना से शारीरिक और मानसिक बल बढ़ता है
  5. 5संकट हरण: किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत

नित्य पाठ की विधि

  • प्रातःकाल स्नान के बाद
  • मंगलवार और शनिवार को 3 या 7 बार पाठ विशेष फलदायी
  • 11 बार पाठ — विशेष संकट में
  • 108 बार पाठ — मनोकामना सिद्धि हेतु

तुलसीदास जी का वचन (उत्तर दोहा)

> 'पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।

> राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥'

— हे पवनपुत्र! आप संकट हरते हैं और मंगलमूर्ति हैं। राम, लखन, सीता सहित मेरे हृदय में वास करें।

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शास्त्रीय स्रोत
हनुमान चालीसा — गोस्वामी तुलसीदास, वाल्मीकि रामायण, हनुमान पुराण
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