विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान के फल मिलने के समय का अत्यंत सुंदर और व्यापक वर्णन है।
जीवनकाल में — गरुड़ पुराण का मूल संदेश है कि जीवन में किए गए दान का फल यममार्ग पर तत्काल मिलता है। मृत्यु के बाद यमदूत पापियों से कहते हैं — 'जल और अन्न का दान कभी क्यों नहीं दिया?' — यह प्रश्न ही बताता है कि दान का फल ठीक यममार्ग पर मिलता है।
मृत्यु के बाद — गरुड़ पुराण के नवें अध्याय में कहा गया है — 'दान के प्रभाव से वह जीव देवताओं से पूजित होकर स्वर्ग को प्राप्त करता है।' यह मृत्यु के तुरंत बाद का फल है।
अगले जन्म में — दान का फल केवल इस जन्म में नहीं, अगले जन्म में भी मिलता है। दानी व्यक्ति अगले जन्म में समृद्ध, स्वस्थ और भाग्यशाली परिवार में जन्म लेता है।
पुण्यकाल में दोगुना — संक्रांति, ग्रहण, अमावस्या और तीर्थ में दिया गया दान शीघ्र फल देता है। मृत्युकाल में किए गए दान का फल हजार गुना होता है।
कर्म के अनुसार — गरुड़ पुराण में 'नाभुक्तं क्षीयते कर्म' — जो कर्म किया गया है उसका फल अवश्य मिलता है। दान का फल भी अनिवार्य रूप से मिलता है — देर हो सकती है, किंतु फल टाला नहीं जा सकता।





