विस्तृत उत्तर
धुंधुली ने संन्यासी द्वारा दिया गया फल नहीं खाया। उसके मन में गर्भ, प्रसव, नियम और बाल-पालन को लेकर अनेक भय और कुतर्क उठे। इसी कारण उसने निश्चय कर लिया कि वह फल नहीं खाएगी। जब आत्मदेव ने उससे पूछा कि फल खा लिया या नहीं, तब उसने सच बताने के स्थान पर कह दिया कि उसने फल खा लिया है। यह झूठ आगे पूरी कथा को मोड़ देता है। धुंधुली फिर अपनी बहन की योजना मानती है, गर्भवती होने का अभिनय करती है, बहन का बालक प्राप्त करती है और फल गाय को खिला देती है। इस झूठ से धुंधुकारी और गोकर्ण के जन्म का अद्भुत प्रसंग बनता है।
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