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आत्मदेव से जुड़े सभी प्रश्न(29)

आत्मदेव पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 29 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

दशम स्कंध पाठ से आत्मदेव को क्या मिला?

कथा के अंत में कहा गया है कि आत्मदेव ने दशम स्कंध का नियमपूर्वक पाठ करके भगवान श्रीकृष्ण के चरण प्राप्त किए।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को कृष्ण की प्राप्ति कैसे हुई?

आत्मदेव ने गोकर्ण के उपदेश से घर छोड़ा, वन में हरि सेवा की और नियमपूर्वक दशम स्कंध का पाठ करके श्रीकृष्ण को प्राप्त किया।

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श्रीमद्भागवत

वन में आत्मदेव को क्या करना था?

गोकर्ण ने आत्मदेव को वन में शरीर-अभिमान और ममता छोड़कर भजन, साधुसेवा, काम-तृष्णा त्याग और कथा-रस में लगने को कहा।

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श्रीमद्भागवत

पुत्र मोह क्यों छोड़ना चाहिए?

गोकर्ण कहते हैं कि पुत्र-मोह अज्ञान है, मोह से नरक की प्राप्ति होती है और शरीर भी नश्वर है।

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श्रीमद्भागवत

गोकर्ण ने आत्मदेव को क्या समझाया?

गोकर्ण ने आत्मदेव को संसार की असारता, पुत्र-धन के मोह का दुख, शरीर की नश्वरता और भजन-साधुसेवा का मार्ग समझाया।

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श्रीमद्भागवत

कुपुत्र से क्या दुख होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण से कथा बताती है कि कुपुत्र धन, घर और माता-पिता की शांति नष्ट कर देता है और मोह को दुख में बदल देता है।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव का धन कैसे नष्ट हुआ?

पहले आत्मदेव ने संतान के लिये आधा धन धर्मकर्म और दान में लगाया; बाद में धुंधुकारी ने कुसंग से पिता की संपत्ति नष्ट कर दी।

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श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी ने माता-पिता के साथ क्या किया?

धुंधुकारी ने माता-पिता को मार-पीटकर घर के बर्तन उठा लिए और पिता की संपत्ति नष्ट कर दी।

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श्रीमद्भागवत

गोकर्ण नाम क्यों रखा गया?

गाय से उत्पन्न उस बालक के कान गाय जैसे थे, इसलिए आत्मदेव ने उसका नाम गोकर्ण रखा।

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श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी नाम कैसे पड़ा?

धुंधुली ने बहन से मिले बालक को अपना पुत्र बताकर उसका नाम धुंधुकारी रखा।

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श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी कैसे जन्मा?

धुंधुकारी धुंधुली का वास्तविक पुत्र नहीं था; धुंधुली की बहन ने अपना जन्मा बालक गुप्त रूप से उसे दे दिया।

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श्रीमद्भागवत

धुंधुली ने पति से क्या झूठ बोला?

धुंधुली ने फल नहीं खाया, पर आत्मदेव के पूछने पर झूठ बोल दिया कि उसने फल खा लिया है।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को फल किसने दिया?

आत्मदेव को पुत्र-प्राप्ति का फल उस संन्यासी योगी ने दिया, जिसने पहले उन्हें पुत्र-मोह छोड़ने को समझाया था।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ने संन्यास क्यों नहीं माना?

आत्मदेव ने संन्यास को नीरस कहा और पुत्र-पौत्र से भरे गृहस्थ जीवन को सरस मानकर पुत्र मांगने का हठ किया।

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श्रीमद्भागवत

राजा सगर और अंग का उदाहरण क्यों दिया गया?

संन्यासी ने सगर और अंग का उदाहरण यह दिखाने के लिये दिया कि संतान भी दुख का कारण बन सकती है।

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श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने पुत्र मोह छोड़ने को क्यों कहा?

संन्यासी ने कहा कि कर्म की गति प्रबल है और पुत्र से सुख निश्चित नहीं; संतान के कारण सगर और अंग को भी दुख मिला।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को सात जन्म तक पुत्र क्यों नहीं मिलना था?

संन्यासी ने आत्मदेव का प्रारब्ध देखकर कहा कि सात जन्म तक उन्हें किसी भी प्रकार पुत्र प्राप्त नहीं होगा।

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श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने आत्मदेव को क्या बताया?

संन्यासी ने आत्मदेव को पुत्र-मोह छोड़ने, कर्म की गति को प्रबल मानने और विवेक से संसार-वासना त्यागने को कहा।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ने जीवन को धिक्कार क्यों कहा?

आत्मदेव ने संतानहीन जीवन, घर, धन और कुल को धिक्कार कहा क्योंकि संतान-अभाव से उन्हें सब व्यर्थ लग रहा था।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव संन्यासी से क्यों रोए?

आत्मदेव संतान-अभाव के दुख से रोए; वे कहते हैं कि उनका सब कुछ सूना हो गया है और वे प्राण त्यागने आए हैं।

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श्रीमद्भागवत

संतान न मिलने पर आत्मदेव कहाँ गए?

संतान न मिलने से दुखी आत्मदेव घर छोड़कर वन गए और प्यास लगने पर एक तालाब के पास बैठ गए।

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श्रीमद्भागवत

पुत्र के लिए आत्मदेव ने क्या दान किया?

आत्मदेव ने पुत्र के लिये पुण्यकर्म किए और दीन-दुखियों को गौ, भूमि, सोना और वस्त्र दान किए।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को संतान क्यों नहीं थी?

संन्यासी ने आत्मदेव का प्रारब्ध देखकर कहा कि सात जन्म तक उन्हें किसी प्रकार संतान नहीं हो सकती।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव दुखी क्यों थे?

आत्मदेव के पास धन और घर होते हुए भी संतान नहीं थी; इसी कारण वे अत्यंत चिंतित और दुखी थे।

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श्रीमद्भागवत

धुंधुली कौन थी?

धुंधुली आत्मदेव की पत्नी थी; वह सुंदर और कुलीन थी, पर हठी, कृपण, झगड़ालू और कुटिल स्वभाव की बताई गई है।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव कहाँ रहते थे?

आत्मदेव तुंगभद्रा नदी के तट पर बसे एक उत्तम नगर में रहते थे, जहाँ लोग सत्य और सत्कर्म में तत्पर थे।

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श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ब्राह्मण कौन थे?

आत्मदेव तुंगभद्रा तट के नगर में रहने वाले वेद और श्रौत-स्मार्त कर्मों में निपुण ब्राह्मण थे।

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श्रीमद्भागवत

गोकर्ण धुंधुकारी कथा क्या है?

गोकर्ण-धुंधुकारी कथा का आरंभ आत्मदेव, धुंधुली, फल, धुंधुकारी और गोकर्ण के जन्म से होता है।

#गोकर्ण कथा#धुंधुकारी#आत्मदेव
लोक

गोकर्ण कौन थे?

गोकर्ण गाय के गर्भ से जन्मे सात्विक दिव्य पुत्र थे, जिन्होंने भागवत पारायण से धुन्धुकारी को प्रेत योनि से मुक्त कराया।

#गोकर्ण#धुन्धुकारी#भागवत महापुराण
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