विस्तृत उत्तर
धुंधुकारी नाम उस बालक को दिया गया जिसे धुंधुली की बहन ने जन्म देकर गुप्त रूप से धुंधुली को सौंप दिया था। धुंधुली ने आत्मदेव को बताया कि उसे पुत्र हुआ है। इससे आत्मदेव और नगर के लोग प्रसन्न हुए। आत्मदेव ने जातकर्म संस्कार किया, ब्राह्मणों को दान दिया और घर में गाना-बजाना तथा मांगलिक कर्म होने लगे। धुंधुली ने फिर यह बहाना भी किया कि उसके शरीर में दूध नहीं है, इसलिए बहन को घर में रखकर बालक का पालन कराया जाए। आत्मदेव ने पुत्र की रक्षा के लिये वैसा ही किया। इस प्रकार माता धुंधुली ने उस बालक का नाम धुंधुकारी रखा।
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